Tuesday, July 14, 2026
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राममंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण: टिन्नू और सुभाष को 14 घंटे की पुलिस रिमांड


अयोध्या। राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) की अदालत ने मामले के दो प्रमुख आरोपितों रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को 14 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर सौंपने का आदेश दिया है। पुलिस अब दोनों से चोरी की रकम, अन्य सामान की बरामदगी तथा पूरे षड्यंत्र से जुड़े तथ्यों के संबंध में पूछताछ करेगी।

अदालत के आदेश के मुताबिक दोनों आरोपित 15 जुलाई को सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक पुलिस हिरासत में रहेंगे। इस दौरान विवेचक उन्हें आवश्यकतानुसार विभिन्न स्थानों पर ले जाकर पूछताछ करने के साथ संभावित बरामदगी की कार्रवाई भी कर सकेंगे।

मामले की विवेचना कर रहे क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने 10 जुलाई को विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन की अदालत में दोनों आरोपितों की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करते हुए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। विवेचक का कहना था कि मंदिर से चोरी हुई नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की बरामदगी के अलावा घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा पुलिस हिरासत में पूछताछ के बिना संभव नहीं है।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क रखे। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने रिमांड का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने गणना प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव और उनके सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को 14 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजने का आदेश पारित किया।

अब पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ से चढ़ावा चोरी प्रकरण से जुड़े कई अहम पहलुओं से पर्दा उठेगा और मामले में साक्ष्य जुटाने के साथ चोरी गई संपत्ति की बरामदगी में भी प्रगति होगी।


आरोपी लवकुश के निर्माणाधीन मकान पर सीलिंग की तैयारी, अंतिम नोटिस चस्पा


राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी लवकुश मिश्रा के निर्माणाधीन मकान पर अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने अंतिम नोटिस चस्पा कर दिया है। प्राधिकरण के अनुसार 3 जुलाई को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद भवन से संबंधित मानचित्र या अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। अब 15 जुलाई तक सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अंतिम अवसर दिया गया है। निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब या वैध अभिलेख न मिलने पर निर्माणाधीन भवन को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।

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