अम्बेडकर नगर। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर शुक्रवार को अकबरपुर स्थित आशीर्वाद मेडिकल सेंटर में आशीर्वाद फाउंडेशन के तत्वावधान में जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने नशे की लत को गंभीर बीमारी बताते हुए समय पर उपचार, काउंसलिंग और परिवार के सहयोग को नशामुक्ति की सबसे बड़ी कुंजी बताया।
मुख्य वक्ता डॉ. जे.के. वर्मा ने कहा कि नशा एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप की तरह समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उपचार के बाद दोबारा नशे की ओर लौटने की आशंका बनी रहती है, इसलिए मरीज और परिजनों को निराश होने के बजाय धैर्य रखते हुए लगातार उपचार जारी रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में दवा और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जाता है, जबकि बाद के चरण में काउंसलिंग, विशेषकर मोटिवेशनल एनहांसमेंट थेरेपी, सबसे प्रभावी साबित होती है। इसके माध्यम से मरीज को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसमें कई माह से लेकर दो वर्ष तक का समय लग सकता है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति पर दबाव बनाना, मारपीट करना या पुलिस का सहारा लेना समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे लोगों को सबसे अधिक परिवार और समाज के प्यार, सहयोग और अपनत्व की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त व्यक्ति ही नशामुक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं, जिसके लिए परिवार, विद्यालय, समाज और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
संगोष्ठी में काउंसलर एवं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुश्री पंजतन ने रोल प्ले के माध्यम से बताया कि उपचार के लिए तैयार न होने वाले लोगों को सकारात्मक संवाद और प्रेरणा से किस प्रकार इलाज के लिए तैयार किया जा सकता है।
इस दौरान आशीर्वाद फाउंडेशन से जुड़े नशामुक्त हो चुके लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार के सहयोग और उचित उपचार से नशे की लत पर विजय पाई जा सकती है। अब वे स्वयं भी अन्य लोगों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
कार्यक्रम में नशे से प्रभावित व्यक्ति, उनके परिजन तथा आशीर्वाद फाउंडेशन के सदस्य अभिषेक पांडेय, शरद वर्मा, शशिकांत, आज़ाद, मित्रसेन सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।