Friday, June 26, 2026
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78 वर्षीय हाई-रिस्क मरीज में एक साथ सफल हुई TAVI और जटिल एंजियोप्लास्टी, टेंडरपाम हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धि


लखनऊ। टेंडरपाम हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग ने 78 वर्षीय एक उच्च जोखिम वाले मरीज में अत्याधुनिक हृदय उपचार की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों की टीम ने एक ही सिटिंग में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) और जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (PCI) सफलतापूर्वक की।

अस्पताल के अनुसार मरीज मधुमेह, कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD), उच्च रक्तचाप, पेसमेकर तथा गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से पीड़ित थे। इन सभी कारणों से पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम अत्यधिक था। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बिना ओपन सर्जरी के अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए दोनों प्रक्रियाएं एक साथ पूरी कीं।

प्रक्रिया के दौरान मरीज में विश्व की उन्नत ट्रांसकैथेटर वाल्व तकनीकों में शामिल एडवर्ड सैपियन अल्ट्रा रेसिलिया (Edwards Sapien Ultra Resilia) वाल्व प्रत्यारोपित किया गया। इस वाल्व की विशेषता इसका रेसिलिया टिश्यू है, जो सामान्य वाल्व की तुलना में काफी धीमी गति से खराब होता है। उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार इसकी अनुमानित आयु लगभग 25 वर्ष तक हो सकती है, इसलिए इसे सरल शब्दों में “एक वाल्व, पूरी जिंदगी के लिए” भी कहा जाता है।

डॉक्टरों ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान की गई कोरोनरी एंजियोग्राफी में हृदय की धमनियों में गंभीर कैल्सीफाइड ब्लॉकेज मिला, जिसे सामान्य एंजियोप्लास्टी से ठीक करना संभव नहीं था। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी और इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिप्सी (IVL) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर मुख्य धमनी एलएडी (LAD) में दो स्टेंट सफलतापूर्वक लगाए गए।

सफल उपचार के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर रही और उन्हें केवल तीन दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, एक ही सिटिंग में TAVI और जटिल PCI करने की यह रणनीति न केवल उपचार के बेहतर परिणाम देती है, बल्कि मरीज के लिए कुल जोखिम भी कम करती है। उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की यह अपनी तरह की शुरुआती और महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की आधुनिक तकनीकों की मदद से अब ऐसे बुजुर्ग और उच्च जोखिम वाले मरीजों का भी सफल उपचार संभव हो गया है, जिनके लिए पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी कराना कठिन या अत्यधिक जोखिमपूर्ण माना जाता था।

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