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जिला अस्पताल में सफेद कोट पर काला दाग , इलाज के नाम पर 2500 रिश्वत की मांग

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ayodhya samachar

अंबेडकर नगर। जिला अस्पताल जहाँ गरीब और असहाय मरीज निःशुल्क इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में चल रही रिश्वतखोरी ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। सोमवार को वायरल हुए ऑडियो ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है।


इलाज के लिए 2500 रुपये की मांग


जानकारी के मुताबिक अस्पताल में तैनात आर्थो सर्जन डॉ. पुरेंद्र के सहायक ने एक मरीज से ऑपरेशन के दौरान पड़े रॉड को निकालने के लिए 2500 रुपये की मांग की। इस अवैध मांग से व्यथित मरीज ने साहस जुटाते हुए पूरी बातचीत की वॉयस रिकॉर्डिंग कर ली। यही रिकॉर्डिंग अब रिश्वतखोरी की गवाही दे रही है।


जिलाधिकारी से शिकायत, जांच समिति गठित


पीड़ित मरीज ने पूरा मामला जिलाधिकारी को लिखित तहरीर देकर बताया और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति तथ्यों की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।


जनता में गुस्सा और अविश्वास


इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि जिला अस्पताल में आये दिन पैसे लेकर इलाज करने की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन अक्सर इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। आमजन का कहना है कि यदि अस्पताल में भ्रष्टाचार का यह खेल इसी तरह चलता रहा तो गरीब और मध्यमवर्गीय लोग सरकारी अस्पतालों से पूरी तरह भरोसा खो बैठेंगे।


गरीब मरीजों पर भारी बोझ


अस्पताल में अवैध वसूली का सबसे ज्यादा असर गरीब और असहाय मरीजों पर पड़ रहा है। जो लोग प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं, वे जिला अस्पताल आते हैं। लेकिन यहाँ भी उन्हें उपचार के नाम पर धन उगाही का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार के लाख दावों के बावजूद हकीकत बिल्कुल विपरीत दिख रही है।


प्रशासन की चुनौती


यह मामला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जनता की निगाहें अब जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या इस प्रकरण में वास्तविक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या मामला फिर दबा दिया जाएगा। यदि दोषी पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक चिकित्सक की लापरवाही मानी जाएगी बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की साख पर बड़ा धब्बा साबित होगा।

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