अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक वार्ता में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक शांति और स्वस्थ जीवन का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि के सूत्र “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” का अर्थ है कि योग मन के उतार-चढ़ाव को शांत और नियंत्रित करता है।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि नियमित योग और ध्यान करने से शरीर में सेरोटोनिन एवं गाबा जैसे सकारात्मक हार्मोन बढ़ते हैं, जबकि तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कार्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर कम होता है। इससे अवसाद, चिंता, घबराहट, अनिद्रा, तनावजनित सिरदर्द और विभिन्न प्रकार के फोबिया में राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि योग उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पेट संबंधी विकारों तथा क्रोनिक फटीग सिंड्रोम जैसी मनोशारीरिक समस्याओं में भी लाभकारी सिद्ध होता है।
उन्होंने बताया कि योग और ध्यान के दौरान मस्तिष्क में विशेष प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिन्हें ब्रेन मैपिंग और इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) के माध्यम से मापा जा सकता है। तनाव की स्थिति में बीटा वेव अधिक सक्रिय रहती है, जबकि ध्यान और योग के दौरान अल्फा, थीटा और डेल्टा तरंगों का प्रभाव बढ़ता है, जो मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ावा देती हैं।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि वर्तमान समय में युवा और किशोर वर्ग पढ़ाई के दबाव, करियर की प्रतिस्पर्धा, नौकरी की चुनौतियों, पारिवारिक तनाव और भौतिकवादी जीवनशैली के कारण मानसिक दबाव का सामना कर रहा है। वहीं संपन्न वर्ग भी अत्यधिक सुविधाओं और असंतुलित जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है।
उन्होंने लोगों से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का वातावरण भी तैयार करता है।