◆ किसी सरकारी अस्पताल के पास नहीं विद्युत सुरक्षा प्रमाणन
अयोध्या। जिला महिला चिकित्सालय में आग लगने की घटना को लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। स्थिति यह है कि जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल के पास वर्तमान में विद्युत सुरक्षा संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, किसी अस्पताल प्रशासन ने अब तक इसके लिए आवेदन तक नहीं किया है।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय के नियमों के अनुसार किसी भी संस्थान को विद्युत सुरक्षा एनओसी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। निर्धारित मानकों की जांच एवं परीक्षण के बाद तीन वर्षों के लिए प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस दिशा में उदासीनता बरती जा रही है।
गौरतलब है कि 22 मई को जिला महिला चिकित्सालय में हुई आगजनी की घटना ने अस्पतालों की विद्युत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अस्पतालों में चौबीसों घंटे बिजली से संचालित उपकरण, एयर कंडीशनर और जीवन रक्षक मशीनें चलती हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक नरेन्द्र यादव ने बताया कि अब तक जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल की ओर से विद्युत सुरक्षा एनओसी के लिए आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी इस संबंध में कोई संपर्क नहीं किया है।
निरीक्षण में उजागर हुईं खामियां, अस्पताल प्रशासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
जिला महिला चिकित्सालय में शुक्रवार को विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया। सहायक निदेशक नरेन्द्र यादव के नेतृत्व में पहुंचे अधिकारियों ने अस्पताल की विद्युत व्यवस्था, वायरिंग और उपकरणों का परीक्षण किया तथा कई तकनीकी कमियों को चिह्नित किया।
सहायक निदेशक ने बताया कि भवनों में समय-समय पर एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरण तो स्थापित कर दिए जाते हैं, लेकिन उनकी क्षमता के अनुरूप वायरिंग और सुरक्षा प्रबंधों का विस्तार नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में विद्युत भार बढ़ने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया कि महिला अस्पताल में भी इसी प्रकार की कई कमियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अस्पताल प्रशासन को भेजी जाएगी, ताकि समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।