अयोध्या। रामनगरी अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हरियाणा से आए 30 जन्मजात नेत्रहीन भक्तों ने गहन श्रद्धा और उत्साह के साथ रामलला के दर्शन किए। दृष्टि न होने के बावजूद उनके मन में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति का भाव साफ झलक रहा था। मंदिर परिसर में उनके आगमन से वातावरण भावुक और आध्यात्मिक हो उठा।
इन दिव्यांग श्रद्धालुओं ने न केवल दर्शन किए, बल्कि मंदिर में चल रहे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भी सक्रिय रूप से भाग लिया। उनके साथ आए सहयोगियों ने मंदिर की भव्यता, स्थापत्य शैली, गर्भगृह की विशेषता और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्रद्धालुओं ने स्पर्श, ध्वनि और अनुभूति के माध्यम से मंदिर की दिव्यता को महसूस किया और अपने भीतर एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
भक्तों का कहना था कि अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करना उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने बताया कि भले ही वे अपनी आंखों से प्रभु के दर्शन नहीं कर सकते, लेकिन मन और आस्था के माध्यम से उन्होंने प्रभु श्रीराम को साक्षात अनुभव किया। कई श्रद्धालु भावुक भी नजर आए और इस यात्रा को अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
मंदिर प्रशासन द्वारा दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सहयोगियों और मंदिर कर्मियों के सहयोग से पूरी यात्रा सुगमता से संपन्न हुई। यह यात्रा आस्था, समर्पण और विश्वास की ऐसी मिसाल बनकर उभरी, जिसने यह साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति के लिए आंखों से देखना जरूरी नहीं, बल्कि दिल से महसूस करना महत्वपूर्ण होता है।