जलालपुर, अंबेडकर नगर। प्रदेश सरकार द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से प्रत्येक शनिवार को आयोजित किए जाने वाले थाना समाधान दिवस की जमीनी हकीकत शनिवार को जलालपुर कोतवाली परिसर में देखने को मिली, जहां यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह गया।
निर्धारित समय पर थाना समाधान दिवस का आयोजन तो किया गया, लेकिन दोपहर लगभग एक बजे तक कोतवाली परिसर में न तो कोई राजस्व अधिकारी उपस्थित रहा और न ही अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी पहुंचे। अधिकारियों की अनुपस्थिति के चलते एक भी फरियादी अपनी शिकायत दर्ज कराने नहीं आया। पूरे कार्यक्रम के दौरान केवल कोतवाल संतोष कुमार सिंह ही मौके पर मौजूद नजर आए।
सरकार की मंशा है कि थाना समाधान दिवस के माध्यम से आम जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित कर समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाए, लेकिन जलालपुर कोतवाली में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने इस योजना की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब संबंधित अधिकारी ही समय पर उपस्थित नहीं होते, तो फरियादियों को इस व्यवस्था से क्या लाभ मिल पाएगा।
फरियादियों को यह उम्मीद रहती है कि समाधान दिवस के अवसर पर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और संबंधित विभागों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाएगी, किंतु अधिकारियों की गैरहाजिरी से लोगों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि सरकार की जनहितकारी योजनाओं की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।
स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि थाना समाधान दिवस को पूरी गंभीरता से लिया जाए और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को इस योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।