अंबेडकर नगर। जनपद में मवेशियों को प्रभावित करने वाली खतरनाक बीमारी लंपी वायरस तेजी से फैल रही है। समय से इलाज न मिलने के कारण कई पशुओं की मौत भी होने की चर्चा है। हालांकि पशुपालन विभाग दावा कर रहा है कि टीकाकरण अभियान चलाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अभियान महज कागजों तक ही सीमित है।
लंपी वायरस से ग्रसित मवेशियों के शरीर पर गांठें पड़ने लगती हैं, तेज बुखार, आंख और नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने वाले पशु इस बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। लगभग एक माह से यह बीमारी पूरे जिले में पैर पसार चुकी है।
जनपद के कोडरा, मोहनपुर गिरंट, मौरापारा, खेंवार, जैनपुर, परासी, प्रतापपुर चमुर्खा, तिवारीपुर और धरमपुर सहित अधिकांश गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंपी वायरस मक्खियों, मच्छरों और अन्य खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए फैलता है। बचाव के लिए संक्रमित मवेशियों को अन्य पशुओं से अलग रखने, कीटनाशक फिनायल का छिड़काव करने और नीम की पत्तियों से धुआं करने की सलाह दी जाती है। घरेलू नुस्खों में हल्दी व सरसों का तेल लगाना, नीम की सूखी छाल का लेप करना और संक्रमित गाय के दूध को उबालकर उपयोग करना भी कारगर बताया गया है। पशुपालक सतीराम बर्मा, बिशाल बिश्वकर्मा, अशोक शुक्ला, राममिलन मिश्र, मनोज बर्मा और सेतू गुप्ता का कहना है कि यदि समय से टीकाकरण हुआ होता तो यह बीमारी इतनी तेजी से न फैलती। उनका आरोप है कि विभाग केवल कागजों में अभियान चला रहा है। इस संबंध में जब जिला पशु चिकित्साधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पशुपालक मवेशियों की सही देखभाल करें और स्वच्छता बनाए रखें, जिससे संक्रमण फैलने से रोका जा सके।