@ के.के तिवारी
आलापुर अंबेडकर नगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्त्वाकांक्षी परियोजना गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे अब आमजनमानस के लिए सुविधा नहीं बल्कि परेशानी का सबब बनती जा रही है। जिस एक्सप्रेसवे के निर्माण से लोगों ने यात्रा को सुगम और सुलभ बनाने के सपने देखे थे, आज वही एक्सप्रेसवे टोल वसूली के कारण विवादों का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इस एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हुआ था, तो क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि बड़ी दूरी मिनटों में तय हो सकेगी और आवागमन में नई क्रांति आएगी। लेकिन जैसे ही एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा शुरू हुआ और वाहनों से वसूली होने लगी, लोगों की उम्मीदें धीरे-धीरे टूटने लगीं। खास बात यह है कि अब इस पर मोटरसाइकिल सवारों से भी टोल वसूला जा रहा है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। छोटी दूरी तय करने के लिए भी सैकड़ों रुपये का टोल देना पड़ रहा है, जिससे गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों में नाराज़गी साफ देखी जा सकती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले तो सुविधा के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि टोल से बचने के लिए लोग वैकल्पिक मार्गों की तलाश में हैं। कई बार टोल वसूली को लेकर विवाद भी हो चुके हैं। कोई गुस्से में बहस करता है तो कोई अपना वाहन मोड़कर वापस लौट जाता है। गौरतलब है कि टोल टैक्स की दरों को लेकर पारदर्शिता की मांग भी उठ रही है, लेकिन अभी तक प्रशासन या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि या तो टोल दरों को यथासंभव कम किया जाए या फिर दोपहिया व छोटे वाहन चालकों को इससे मुक्त किया जाए, जिससे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे सच में जनसुविधा का माध्यम बन सके, न कि जनविरोध का कारण।