Tuesday, September 29, 2026
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श्रीरामलला की कलाई पर बंधेगी बहन शांता की राखी, राममंदिर में पहली बार रक्षाबंधन पर्व का भव्य आयोजन


◆ श्रृंगी ऋषि आश्रम से पहुंचेगा राखी का रक्षासूत्र, मधुबनी कला में सजी राखियों से होगा ऐतिहासिक पूजन


अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में इस बार रक्षाबंधन का पर्व ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों ही रूपों में विशेष बन गया है। प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला रक्षाबंधन होगा, जिसमें भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की कलाई पर उनकी बड़ी बहन देवी शांता की ओर से राखी बांधी जाएगी।

ये राखियां कोई सामान्य नहीं, बल्कि मधुबनी शैली में जरी, मोतियों और आध्यात्मिक तत्वों से सजाई गईं इकोफ्रेंडली राखियां हैं, जिन्हें ‘जूट फॉर लाइफ’ संस्था की महिला कारीगरों ने विशेष रूप से तैयार किया है। प्राकृतिक तत्वों से बनी ये राखियां प्रेम, भक्ति और भारतीय परंपरा का प्रतीक हैं।

इस पावन अवसर पर 6वां श्रीरामलला रक्षाबंधन महोत्सव भी मनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत 6 अगस्त से तीन दिवसीय पूजन–अर्चन और सांस्कृतिक आयोजनों से होगी। 8 अगस्त को श्री श्रृंगी ऋषि आश्रम से शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो कारसेवकपुरम् पहुंचकर मंदिर ट्रस्ट को राखी, फल और मिष्ठान्न भेंट करेगी।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रृंगी ऋषि वही हैं जिनके पुत्रेष्टि यज्ञ से श्रीराम का जन्म हुआ था, और उनका विवाह राजा दशरथ की पुत्री देवी शांता से हुआ था। इसलिए देवी शांता की ओर से हर वर्ष प्रभु श्रीराम को यह रक्षासूत्र उनके द्वारा अयोध्या भेजा जाता है।

इस बार की राखी इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह श्रीराम दरबार और बालक रामलला दोनों के लिए अलग–अलग शैली में बनी है, जो मंदिर के गर्भगृह में विधिपूर्वक पूजन के बाद बांधी जाएंगी।

मीडिया प्रभारी अनुराग सिंह ने बताया कि यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाई–बहन के प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण है।

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