उन्होंने कहा कि जब हम इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण कर रहे थे, तब भी सपा विरोध कर रही थी। राममंदिर का शिलान्यास के साथ 500 वर्षो के बाद रामलला के विराजमान होने का सपा ने विरोध किया। अयोध्या के इंटरनेशनल एयरपेर्ट के निर्माण का भी सपा ने विरोध किया था। निषादराज के नाम पर रैन बसेरे व मां शबरी के नाम पर रेस्टोरेंट का सपा ने विरोध किया था। सपा को पीड़ा हो रही है। सपा की पीड़ा को आप समझ सकते है। सपा पार्टी के अध्यक्ष ने पिछले दो महीने के ट्वीट को देखिए, जो भी वक्तव्य दिए है। इस सदी के सबसे बड़े सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महाकुम्भ का विरोध करते हुए उनके ट्वीट आए है। 34 करोड़ लोग प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके है। देश दुनिया के श्रद्धालु आ रहे है। सनातन धर्म का गौरव बढ़ता हुआ देखकर सपा को पीड़ा होती है।
जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हमने तीन महिला पीएसी बटालियन का नामकरण वीरांगना उदा देवी, झलकारी बाई व आवंतीबाई के नाम पर किया तो सपा को पीड़ा हुई। देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाली तीनो वीरांगना के नाम पर बटालियन गठित होने का सपा ने विरोध किया। यह वही सपा है जो सुहेलदेव के स्मारक का विरोध करती है। इनका कहना है कि गाजी का होना चाहिए। इनको मोइद खान प्यारा है। कन्नौज का नवाब सिंह यादव प्यारा है। हर माफिया, दुष्चरित्र के साथ सपा है। घटना के पीछे सपा का हाथ होता है और षड़यंत्र में खड़ी हुई दिखाई देती है। उन्हें देश का गौरव बढ़ने, वाल्मीकि, रविदास, उदा देवी, झलकारी बाई, अवंतीबाई के नामकरण का विरोध करते है। जब अखिलेश मुख्यमंत्री बने थे तो इन्होंने कन्नौज मेडिकल कालेज से बाबा साहब अम्बेडकर का नाम हटाने का पाप किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या देश दुनिया के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। 2016 में यहां कुल टूरिस्ट 2 लाख 35 हजार आए थे। लेकिन 2024 में 16 करोड़ 11 लाख श्रद्धालु अयोध्या आए। इनकी कोई तुलना है। 2014 व 2017 के पहले की अयोध्या व उसके बाद की अयोध्या में जमीन आसमान का अंतर जनता को दिख रहा है। हेलीकाप्टर से जाते समय जनसैलाब दिखाई दे रहा था। अगर अयोध्या में चार लेन की सड़के, रेलवे लाइन डबल, रेलवे स्टेशनों का सुद्ढ़ीकरण व एयरपोर्ट का नामकरण के साथ विस्तारीकरण न होता तो क्या प्रतिदिन आने वाले इतने श्रद्धालु यहां आ पाते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा विकास, लोकल्याण विरोधी है। इसकी दृष्टि सैफई के बाहर नहीं जाती है। परिवार वाद के साथ वोट मांगने लिए जाति का सहारा लेते है। मिल्कीपुर का उपचुनाव राष्ट्रवाद बनाम परिवारवाद बन गया है। एक तरफ भाजपा प्रत्याशी राष्ट्रवादी कार्यकर्ता चन्द्रभानु पासवान है, दूसरी तरफ परिवारवाद का नमूना, जिनका नाम भूमाफिया, अनैतिक व अजराक गतिविधियों में शामिल होने में आता है। वह चुनाव मैदान में है। सब सुधर सकते है लेकिन व्यक्ति की प्रवृत्ति नहीं सुधरती। कहावत है कि कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती है। यह सुधरेंगे नहीं, क्योकि अपराध, गुंडागर्दी, बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाना इनका पेशा है। किस प्रकार इनका नारा चलता है। सपा का नारा है, खाली प्लाट हमारा है। 2017 में जब सरकार आई तो एंटी भूमाफिया टाक्स फोर्स का गठन किया। भूमाफियों के कब्जे से भूमि खाली कराई। तब से इनकी बौखलाहट बढ़ी है। इससे इनके रोजगार व रोजी रोटी का जरिया चौपट हो गया है। इसके चौपट होने के भय से यह घड़ियाली आंसू बहाने का कार्य कर रहे है। इनके बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं है। यूपी के नौजवानो को पहचान का संकट खड़ा किया। यूपी के विकास को बाधित किया।