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अनोखा बदलाव – बीएससी पाठ्यक्रम में एक विषय के विषम समेस्टर से हटाया गया प्रैक्टिकल

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Ayodhya Samachar

◆ विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 150 महाविद्यालयों के करीब दस हजार विद्यार्थी होंगे प्रभावित


अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में बीएससी पाठ्यक्रम में किया गया बदलाव व समय से इन बदलावों की सूचना सम्बद्ध महाविद्यालयों के छात्रों व शिक्षकों को आधिकारिक सूचना न देना लापरवाही को दर्शता है। इस निर्णय से विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 150 महाविद्यालयों के करीब दस हजार विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

विश्वविद्यालय द्वारा बीएससी के प्रथम, तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर की परीक्षाओं में जंतु विज्ञान विषय से प्रयोगात्मक (प्रायोगिक) क्रियाकलाप पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि सत्र प्रारंभ होने से पूर्व इस महत्वपूर्ण परिवर्तन की कोई सूचना न तो महाविद्यालयों को दी गई और न ही इसे विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया। अधिकांश महाविद्यालय अब तक इस बदलाव से औपचारिक रूप से अनभिज्ञ बताए जा रहे हैं।

शिक्षाविदों का कहना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के मूल प्रावधानों के विपरीत है। एनईपी-2020 के अंतर्गत बीएससी जंतु विज्ञान के विषम सेमेस्टर में सैद्धांतिक अध्ययन के लिए 4 क्रेडिट और प्रयोगात्मक अध्ययन के लिए 2 क्रेडिट निर्धारित थे, किंतु बिना किसी स्पष्ट कारण के प्रयोगात्मक क्रेडिट समाप्त कर केवल सैद्धांतिक अध्ययन के लिए 6 क्रेडिट निर्धारित कर दिए हैं।

चिंताजनक तथ्य यह भी है कि बीएससी वनस्पति विज्ञान और रसायन विज्ञान के पाठ्यक्रमों में इस प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं की गई, जिससे जंतु विज्ञान के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप भी लग रहा है। बताया जा रहा है कि इस बदलाव को न तो विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से अनुमोदन प्राप्त है और न ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से कोई अनुमति ली गई है।

          जन्तु विज्ञान विषय के समन्वयक प्रोफेसर राम नयन सिंह से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन वार्ता नही हो पाई। साकेत महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. बी.के. सिंह ने कहा कि इस तरह के एकतरफा और अपारदर्शी निर्णय से लगभग दस हजार विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। समय पर सूचना न मिलने से छात्र और शिक्षक दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल इस निर्णय को वापस लेने और स्पष्ट स्थिति सामने रखने की मांग की है।

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