Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या अंधविश्वास व अज्ञानता है सर्पदंश उपचार में बाधा

अंधविश्वास व अज्ञानता है सर्पदंश उपचार में बाधा

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◆ सर्प-दंश का तुरंत करें मेडिकल ट्रीटमेंट


◆ बिग-फोर स्नेक में साइलेंट-किलर है करैत


अयोध्या। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग पचास हजार लोग सांप काटने से मरते हैं। हमारे देश में कोबरा,करैत,रसेल-वाइपर व सा-स्केल्ड वाईपर नामक चार प्रमुख विषैले सांप हैं जिन्हे बिग-फोर स्नेक ऑफ इंडिया कहा जाता है। वैसे विषैले साँपों की कुल संख्या दस है।  इनका प्रजनन काल मार्च-अप्रैल से शुरु होता है और सक्रियता बरसात भर रहती है। कोबरा दंश में आधा इंच दूरी पर दो बड़े निशान दिखते हैं। इनके दिखते ही  नीम-हकीम और झाड़- फूँक में न पड़कर सीधे अस्पताल जाना चाहिये। विषरोधी इंजेक्शन या एन्टीवेनम इंजेक्शन से जान बच जाती है। शक की दशा में भी एंटीवेनम लगाया जा सकता है क्योंकि यह विष नहीं प्रतिविष है। एन्टीवेनम के चार से चौदह वायल लग सकते हैं। दंश के स्थान पर चीरा व बांधने की बजाय दंशित व्यक्ति को सीधा व स्थिर रखना चाहिये।


डा आलोक मनदर्शन

 “जहरीले जन्तु के काटने” जैसे शीर्षक की खबरें भी सर्प दंश ही होती हैं ,  क्योंकि और कोई ऐसा जहरीला जन्तु नहीं है जो जानलेवा हो। करैत को साइलेन्ट  किलर कहा जाता है, क्योंकि यह अक्सर रात में सोते वक्त काटता है तथा इसके विषदंत महीन सुई जैसे होने के कारण गहरी नींद में दंश का अहसास भी न के बराबर होता है। सर्प और सर्पदंश से जुड़ी अंधविश्वास व भ्रान्ति के चंगुल में न पड़कर तत्काल मेडिकल ट्रीटमनेट से हज़ारो अकाल मौत को रोका जा सकता है।  सर्पदंश-संदर्भित सामयिक मनोजागरूकता वार्ता में यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा आलोक मनदर्शन ने दी।

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