अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में मिले “बम बनाने की विधि” वाले हस्तलिखित नोट को लेकर हिरासत में लिए गए छात्र मोहम्मद सरफराज को पुलिस ने रविवार को छोड़ दिया। करीब 26 घंटे तक चली पूछताछ, तकनीकी विश्लेषण और विभिन्न स्तरों पर किए गए सत्यापन के बाद जांच एजेंसियों को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे किसी आतंकी गतिविधि, आपराधिक षड्यंत्र या सुरक्षा संबंधी खतरे की पुष्टि होती हो। फिलहाल मामले की विवेचना जारी रखी गई है।
घटना सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। छात्र से लगातार पूछताछ की गई और उसके बताए गए तथ्यों का स्वतंत्र रूप से मिलान कराया गया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि नोट तैयार करने के पीछे कोई अन्य उद्देश्य या किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने छात्र के परिजनों से संपर्क किया, लेकिन उनके समय पर नहीं पहुंचने के कारण उसे उसके मकान मालिक की जिम्मेदारी पर छोड़ दिया गया। रविवार दोपहर आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सरफराज अपने परिचित के साथ रवाना हो गया।
क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि अब तक की जांच में कोई ऐसा तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे किसी संदिग्ध या आपराधिक मंशा का संकेत मिले। हालांकि मामले के सभी पहलुओं की जांच पूरी होने तक पुलिस पड़ताल जारी रखेगी।
सीसीटीवीफुटेजभीखंगालागया
जांच के दौरान कॉलेज परिसर के सीसीटीवी फुटेज की भी बारीकी से समीक्षा की गई। फुटेज में छात्र अपने हस्तलिखित नोट की मोबाइल से तस्वीर लेते हुए दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि वह तस्वीर किसी अन्य व्यक्ति को भेजी गई थी या नहीं। इस संबंध में डिजिटल डाटा की भी जांच की गई।
सामग्रीसेज्यादाप्रस्तुतिनेबढ़ाईथीचिंता
जांच में पुलिस ने पाया कि नोट में लिखी गई जानकारी तकनीकी रूप से विस्फोटक तैयार करने के लिए पर्याप्त या उपयोगी नहीं थी। हालांकि जिस तरीके से उसे तैयार किया गया था, उसने कॉलेज परिसर में आशंका का माहौल बना दिया। शीर्षक, चित्र, तीर के निशान और क्रमवार लिखी गई सामग्री ने पहली नजर में इसे गंभीर दस्तावेज जैसा बना दिया था। प्रभारी निरीक्षक पंकज सिंह ने बताया कि नोट में लिखी बातों के आधार पर बम तैयार नहीं किया जा सकता, लेकिन सूचना मिलने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से हर पहलू की गहन जांच करना आवश्यक था।