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शिक्षा क्षेत्र में बाबू देवता सिंह के योगदान को कभी भुलाया नहीं नहीं जा सकता

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– बाबू देवता सिंह के 42वीं पुण्य तिथि पर विशेष

@ बिपिन सिंह

पूराबाजार,अयोध्या। दूरदर्शी और समाज सुधारक रहे कीर्तिशेष बाबू देवता सिंह सूर्यवंशी का सपना सिर्फ अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) जिले के विकास खण्ड पूराबाजार के अति पिछड़े दक्षिणी छोर रामपुर सर्धा के छात्र छात्राओं को समुचित शिक्षा प्रदान करना ही नहीं था , बल्कि एक ऐसे शिक्षण संस्थान का निर्माण करना था , जो राष्ट्रीय एकता , सांस्कृतिक जागरुकता और सेवा भावना के मूल्यों को आगे बढ़ा सके ।
इस अति पिछड़े क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा की नींव रखने वाले सच्चे समाज सेवक , देशभक्त और त्याग की प्रतिमूर्ति बाबू देवता सिंह के पौत्र डॉ० अमित सिंह सोनू ने अपने कुलवंश के सपने को साकार करने के क्रम अपने प्रपितामह श्री निर्भय सिंह के नाम से स्थापित शिक्षण संस्थान जी निर्भय सिंह औद्योगिक इण्टर कालेज का प्रधानाचार्य बन बखूवी संचालन कर रहे है l

बताते चलें कि कीर्ति शेष बाबू देवता सिंह व्यवसाय की दृष्टि से पूरे परिवार के साथ रंगून(वर्मा) जहाँ व्यापार बहुत सुंदर चल रहा था तीन की संख्या में कारखाने थे परन्तु 1964 में राष्ट्रीयकरण के चलते उन्हें सपरिवार स्वदेश आना पड़ा जहाँ पैतृक गांव पहुंच कर रहने लगे । बाबू देवता सिंह एवं उनके अनुज तिलकधारी सिंह ने अपने पिता समाज सेवी व संत स्वभाव के व्यक्ति पिता श्री निर्भय सिंह के जीवन काल की इच्छा थी कि इस पिछड़े क्षेत्र में बेटे-बेटियों के समुचित शिक्षा व्यवस्था की नितांत आवश्यकता है कि यहाँ स्कूल खुले क्यों कि यहाँ से करीब 17 किलो मीटर के परिधि में कोई स्कूल नहीं था । विद्यालय के संस्थापक/ प्रबंधक बाबू देवता सिंह एवं अनुज तिलकधारी सिंह ने क्षेत्र वासियों राम शब्द सिंह , ठाकुरद्दीन वर्मा , राम बुझारत यादव के साथ साथ क्षेत्र की अन्य विभूतियां जगदीश पाण्डेय , राम प्रसाद वर्मा , श्री नारायण पाण्डेय ,राज बहादुर पाण्डेय , नारायण दास गुप्ता आदि का उल्लेखनीय सहयोग रहा | इसी सहयोग के चलते 1972 ई० में इस विद्यालय का उच्चीकरण हो गया । तत्कालीन प्रबंधक बाबू देवता ने 6 कमरों का निर्माण कराया । वहीं 1975 में इण्टर मीडिएट साहित्यवर्ग की मान्यता प्राप्त हुई l इस कालेज में इण्टरमीडिएट तक हिन्दी , संस्कृत , अंग्रेजी इतिहास , समाजशास्त्र एवं शिक्षा शास्त्र के विषयों का पठन पाठन शुरु हो गया था । इधर 30 जनवरी 1984 को तत्कालीन संस्थापक प्रबंधक बाबू देवता सिंह का निधन हो गया । 2007 में बाबू देवता सिंह के पुत्र तत्कालीन प्रबंधक स्मृर्ति शेष ठाकुर राज करन सिंह के अथक प्रयास से इण्टर मीडिएट विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हुई । श्री निर्भय सिंह औद्योगिक इण्टर कालेज के मौजूदा प्रधानाचार्य डॉ० अमित सिंह सोनू के पितामह बाबू देवता सिंह द्वारा लगाया गया पौध आज विशाल वट वृक्ष बन चुका है , जिनसे हजारों हजारों लोग शिक्षा की रोशनी पा रहे हैं ।
तब से आज तक इस सूर्यवंशी घराने के प्रयास से इस रामपुर सर्धा क्षेत्र को शिक्षा का हब बनाने के लिए नर्सरी से स्नातक और स्नातक से प्रस्नातक तक के कई शिक्षण संस्थान संचालित हो रही हैं ।

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