◆ मंदिर गर्भगृह में रखी जाएगी प्राचीन वाल्मीकि रामायण, चयन हेतु एक विशेष समिति का किया जाएगा गठन
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राम मंदिर निर्माण एवं उससे जुड़े आगामी कार्यक्रमों को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि आगामी 19 मार्च को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अयोध्या दौरे को लेकर अनौपचारिक सहमति प्राप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि 19 मार्च को हिंदू नव वर्ष के पावन अवसर पर राम मंदिर परिसर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रपति राम मंदिर निर्माण से जुड़े लगभग 400 श्रमिकों को सम्मानित करेंगी, जिन्होंने मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय, दिल्ली की ओर से 400 वर्ष पुरानी वाल्मीकि रामायण राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी गई है। यह प्राचीन रामायण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को प्रदान की गई, जो अब राम मंदिर परिसर पहुंच चुकी है। इसके साथ ही कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य द्वारा राम यंत्र स्तोत्र भी ट्रस्ट को सौंपा गया है, जिसे मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया है।
नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि इन पवित्र ग्रंथों एवं ऐतिहासिक धरोहरों को राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए जाने की योजना है। इसके लिए प्राचीन रामायणों के चयन हेतु एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में शीघ्र ही सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया जाएगा।
उन्होंने आगे बताया कि रामलला के अस्थायी मंदिर को एक मेमोरियल के रूप में फरवरी माह के अंत तक तैयार कर लिया जाएगा। वहीं राम मंदिर आंदोलन के शहीदों की स्मृति में बनाए जा रहे स्मारक का कार्य मार्च तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियां एलएंडटी और टीसीएस अप्रैल के अंत तक अपना कार्य पूर्ण कर अयोध्या से वापस लौट जाएंगी। नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राम मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और विरासत का प्रतीक भी बनेगा।