अयोध्या । लखनऊ के हुए भीषण अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अयोध्या में भी कई निजी अस्पताल ऐसे स्थानों पर संचालित हो रहे हैं, जहां तक आपात स्थिति में राहत और बचाव दल का पहुंचना आसान नहीं है। विशेष रूप से महिला चिकित्सालय के सामने स्थित संकरी गलियों में चल रहे अस्पतालों की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच सवाल उठने लगे हैं।
रिकाबगंज-कसाईबाड़ा मार्ग पर महिला चिकित्सालय के सामने कई निजी अस्पताल आवासीय क्षेत्र की तंग गलियों में संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों तक पहुंचने वाले रास्ते इतने संकरे हैं कि यदि मार्ग में कोई वाहन खड़ा हो जाए तो एम्बुलेंस का पहुंचना भी कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में आग या अन्य किसी आपदा के दौरान फायर ब्रिगेड के बड़े वाहन वहां तक नहीं पहुंच पाएंगे, जिससे राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है।
कुछ अस्पताल तो ऐसी गलियों के अंतिम छोर पर स्थित हैं, जहां पहले लगभग 12 फीट और उसके बाद 10 फीट चौड़ा रास्ता ही उपलब्ध है। गली के दोनों ओर आवास होने के कारण लोगों के दोपहिया वाहन अक्सर बाहर खड़े रहते हैं, जिससे मार्ग और संकरा हो जाता है। ऐसे में किसी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है।
इन अस्पतालों में प्रसव और नवजात शिशुओं से जुड़े मामलों का भी उपचार होता है। यदि किसी कारणवश अस्पताल को तत्काल खाली कराने की नौबत आ जाए तो संकरे रास्ते के कारण मरीजों, तीमारदारों और चिकित्साकर्मियों की सुरक्षित निकासी में गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है। दिन के समय ओपीडी में उमड़ने वाली भीड़ इस समस्या को और जटिल बना देती है।
लखनऊ की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों के निजी अस्पतालों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। टीमों द्वारा फायर सेफ्टी उपकरणों, आपात निकास और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुकी है आग की घटना
गत 22 मई को महिला चिकित्सालय की तीसरी मंजिल पर आग लगने की घटना हुई थी। हालांकि अस्पताल कर्मियों की सतर्कता के चलते आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। इस घटना के बाद सरकारी अस्पताल ने अपनी व्यवस्थाओं में सुधार किया, लेकिन आसपास संचालित निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।
निजी अस्पतालों पर लगते रहे हैं आरोप
महिला चिकित्सालय के आसपास स्थित कुछ निजी अस्पताल पहले भी विवादों में रहे हैं। आरोप लगते रहे हैं कि सरकारी अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को दलालों और बिचौलियों के माध्यम से निजी अस्पतालों की ओर भेजा जाता है। 31 मार्च को एक निजी अस्पताल में प्रसूता और उसके नवजात की मौत के बाद परिजनों ने ऐसे ही आरोप लगाए थे।
इसके अलावा मई 2025 में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने क्षेत्र के दो निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान मरीजों को आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से निजी अस्पतालों में भेजे जाने की शिकायतें सामने आई थीं। जांच में भले ही इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन अन्य अनियमितताओं के चलते दो अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटरों पर कार्रवाई की गई थी।