◆ बिना उत्तर लिखे छात्रों को दिए अंक, मूल्यांकन में अनियमितता और कोड ऑफ एथिक्स के उल्लंघन पर विश्वविद्यालय की सख्त कार्रवाई
अयोध्या। डॉ. रामनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर लापरवाही और अनैतिक आचरण के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मां दुर्गा सर्वोदय महाविद्यालय, अरवल (सुल्तानपुर) के प्राचार्य डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव का विश्वविद्यालय से प्राप्त प्राचार्य पद का अनुमोदन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। मविश्वविद्यालय ने इसे छात्र हितों के साथ खिलवाड़, मूल्यांकन प्रक्रिया की शुचिता पर आघात तथा शिक्षक आचार संहिता (कोड ऑफ एथिक्स) का गंभीर उल्लंघन माना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार मूल्यांकन भवन में उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य की निगरानी कर रहे पर्यवेक्षकों ने 28 जुलाई को अपनी रिपोर्ट में डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव के कार्यों पर गंभीर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया कि वह मनोविज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं का अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना तरीके से मूल्यांकन कर रहे थे। मूल्यांकन के दौरान लापरवाही बरतने के बाद वह ड्यूटी छोड़कर इधर-उधर घूमते भी पाए गए।
जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि बीए चतुर्थ सेमेस्टर की मनोविज्ञान विषय की एक उत्तरपुस्तिका में छात्र द्वारा प्रश्नों के उत्तर नहीं लिखे जाने के बावजूद जानबूझकर अंक प्रदान कर दिए गए। इतना ही नहीं, उत्तरपुस्तिका के अंदर अंक दर्ज होने के बावजूद उन्हें मुख्य पृष्ठ पर अंकित नहीं किया गया, जिससे परिणाम प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई। विश्वविद्यालय ने इसे छात्र हितों के प्रति घोर लापरवाही और मूल्यांकन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार माना है।
विश्वविद्यालय का कहना है कि एक प्राचार्य के पद पर आसीन व्यक्ति से शैक्षणिक ईमानदारी और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस प्रकार का आचरण न केवल शिक्षक एवं प्राचार्य के लिए निर्धारित कोड ऑफ एथिक्स के विपरीत है, बल्कि संबंधित महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और प्रशासनिक गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
कुलपति के आदेश के अनुपालन में विश्वविद्यालय ने वर्ष 2015 में जारी वह अनुमोदन आदेश भी निरस्त कर दिया है, जिसके माध्यम से डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव को मां दुर्गा सर्वोदय महाविद्यालय, अरवल, सुल्तानपुर में प्राचार्य के रूप में अनुमोदित किया गया था।