अयोध्या। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित व्याख्यान सत्र में जिला चिकित्सालय के माइंड- मेंटर डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी, खासकर जेन-जी, तेजी से मानसिक दबाव और आवेशी व्यवहार की चपेट में आ रही है। पूरी दुनिया में हर साल लगभग 7.4 लाख लोग आत्महत्या करते हैं, यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान गंवा देता है। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। भारत में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां हर वर्ष करीब 1.72 लाख आत्महत्याओं में छात्रों का अनुपात प्रति घंटे एक बताया गया है।
उन्होंने बताया कि युवाओं में आत्मघाती प्रवृत्ति के पीछे आवेग, अपराधबोध, हताशा, पढ़ाई और करियर का दबाव, माता-पिता की अपेक्षाएं, प्रेम संबंधों में तनाव, यौन शोषण, जुआ और नशा, डिप्रेशन, मूड डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया जैसे कारण प्रमुख हैं। इसके अलावा अकेलापन, प्रियजन की मृत्यु, आर्थिक नुकसान या कर्ज, कानूनी सजा, आपदा, महामारी, गरीबी और गंभीर बीमारी भी आत्महत्या के जोखिम को बढ़ाते हैं।
डॉ. मनदर्शन ने समझाया कि आत्मघाती स्थिति में दिमाग का भावनात्मक हिस्सा (एमिग्डाला) अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जबकि सोच-विचार और निर्णय लेने वाला हिस्सा (प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स) कमजोर पड़ जाता है। इसी कारण व्यक्ति आवेग में आकर घातक कदम उठा लेता है। उन्होंने बताया कि करीब 70 प्रतिशत आत्महत्याएं अचानक आए संकट और आवेग में होती हैं, जबकि 30 प्रतिशत मामले योजनाबद्ध होते हैं।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या रोकने के लिए संवाद, सहयोग और सही समय पर उपचार बेहद प्रभावी उपाय हैं। डोपामिन, ऑक्सीटोसिन, एंडॉर्फिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन जीवन के प्रति सकारात्मकता और मानसिक मजबूती यानी मेंटल रेजिलिएंस बढ़ाते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान की प्रधानाचार्या एवं स्किल इंडिया मिशन के जिला समन्वयक अरुण कुमार के संयोजन में किया गया। सत्र का संचालन यश स्किल्स के प्रतिनिधि दीपक पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, फैकल्टी और स्टाफ उपस्थित रहे।