Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या आवेशी-विचार का भंवर है आब्सेसिव- कम्पल्सिव डिसऑर्डर

आवेशी-विचार का भंवर है आब्सेसिव- कम्पल्सिव डिसऑर्डर

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◆ एक्सपोजर-थिरैपी है ओसीडी की उपचार विधि


◆ ओसीडी यानि आब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर है एक आवेशी-मनोविकार


अयोध्या। इंस्टीट्यूशनल मेंटल-हेल्थ जागरूकता कार्यक्रम के तहत आर्मी पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डा. आलोक मनदर्शन ने बताया किआब्सेशन का मतलब है किसी नकारात्मक विचार की असामान्य पुनरावृत्ति जो उलझन व बेचैनी पैदा करती है तथा इन नकारात्मक विचारों के आवेश से छुटकारा पाने की जुगत में बारंबार किया जाने वाले असामान्य कृत्य को कंपल्शन कहा जाता है।

 ओसीडी के कई प्रकारों में   कंटामिनेशन ओसीडी, परफेक्शन ओसीडी, डाउट एंड हार्म ओसीडी व फोरबिडेन थॉट्स ओसीडी प्रमुख हैं । कंटामिनेशन ओसीडी में साफ-सफाई का आब्सेशन होने के कारण हद से ज्यादा साफ-सफाई के लक्षण दिखते हैं  जिसका फोकस  शरीर,कपड़े,कमरे,घर,ऑफिस, सोफा व बिस्तर आदि हो सकते हैं। चीजें अति सलीके से रखने का भी जूनून दिखता है। डाउट एंड हार्म ओसीडी में  दिमाग में बार-बार संदेही विचार आते हैं जिनमें दरवाजे,सिलेंडर,बिजली उपकरण आदि खुले रह जाने का भय और फिर फिर चेक-रिचेक का कंपल्शन।

फारबिडेन-थॉट्स ओसीडी या निषेध-विचार आशक्ति में कुछ गलत या अशुभ होने के अलावा धर्म,संस्कार,नैतिकता व संस्कृति आदि के विरूद्ध भी अनचाहे विचार आ सकते हैं। ओसीडी के साथ सोशल-फोबिया, क्लास्ट्रोफोबिया, अगोराफोबिया, जनरलाइज्ड-फोबिया, परफारमेंस-फोबिया तथा पैनिक-अटैक या तीव्र-  घबराहट के दौरे के लक्षण सहित मनोशारीरिक या साइकोसोमैटिक असर भी दिख सकते हैं। ओसीडी के प्रति जागरूकता व मनोअंतर्दृष्टि से अनचाहे नकारात्मक विचारों की ओसीडी मनोरोग रूप में पहचान तथा आवेशी-बाध्यता क्रिया यानि कम्पल्सिव-बिहैवियर पर क्रमिक-लगाम का अभ्यास अति प्रभावी है, जिसे ईआरपी यानि एक्सपोजर एंड रेस्पॉन्स प्रिवेंशन थिरैपी कहा जाता है। एंटी-ऑब्सेसिव व एंग्जाइटी-रोधी दवाओं का  भी अहम रोल है ।

कार्यक्रम का संयोजन वाइस-प्रिंसिपल कुसुम सिंह तथा प्रतिभागियों का पर्सनालिटी टेस्ट साइकोलॉजिस्ट अनन्या  त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रमाध्यक्ष प्रिंसिपल डा धीरज श्रीवास्तव द्वारा डा मनदर्शन को एपीएस  सम्मान-चिन्ह प्रदान किया गया।

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