कहा – दोषी कोई भी हो, कठोर दंड मिले
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर रामभक्तों के नाम विस्तृत पत्र जारी किया है। पत्र सोशल मीडिया पर वायरल है। पत्र में उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और शर्मनाक बताते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए तथा दोषी चाहे कोई भी हो, उसे कठोर दंड मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रामलला के मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ी ने सभी रामभक्तों को आहत किया है। उन्होंने जांच एजेंसियों, एसआईटी, पुलिस और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि अपराधी बच नहीं पाएंगे और सत्य सामने आएगा।
स्वामी गोविंद देव गिरि ने पत्र में स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के न्यासी अथवा कोषाध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कभी किसी व्यक्ति से मंदिर के लिए नकद राशि या कोई उपहार स्वीकार नहीं किया। उन्होंने केवल दो अपवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी दिवंगत बड़ी बहन ने 11 हजार रुपये तथा एक श्रद्धालु ने एक किलोग्राम चांदी की ईंट दान की थी, जिसकी विधिवत रसीद तत्काल जारी कर दी गई थी। इसके अलावा उन्होंने किसी से चेक के अतिरिक्त कोई धनराशि या वस्तु स्वीकार नहीं की।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के सभी वित्तीय भुगतान सीधे बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से किए जाते हैं। वह ट्रस्ट के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं और उनके पास कोई चेकबुक भी नहीं है। मंदिर की ओर से नकद भुगतान नहीं किए जाते।
कोषाध्यक्ष ने कहा कि रामभक्तों द्वारा हंडी में अर्पित चढ़ावे की गणना से उनका प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है। उनका निवास पुणे में है और गणना की प्रक्रिया स्थानीय न्यासियों की देखरेख में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार संचालित होती रही है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया की जानकारी उन्हें हाल ही में पहली बार विस्तार से दिखाई गई।
उन्होंने कहा कि उनका दायित्व आय-व्यय के लेखे-जोखे का परीक्षण करना है। ट्रस्ट के खातों का नियमित ऑडिट होता है और प्रत्येक माह पुणे कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट अयोध्या आकर वित्तीय अभिलेखों की समीक्षा करते हैं।
भविष्य के लिए स्वामी गोविंद देव गिरि ने चढ़ावे की गणना और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने विशेषज्ञों की सलाह से ऐसी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया, जिसमें प्रत्येक दान का स्पष्ट लेखा-जोखा और सतत निगरानी सुनिश्चित हो सके।
पत्र के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान श्रीराम की कृपा से सत्य की विजय होगी और रामलला का मंदिर विश्व के लिए आदर्श पारदर्शी धार्मिक संस्थान के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने सभी रामभक्तों से धैर्य बनाए रखने और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखने की अपील भी की।