◆ तीन घंटे चली ट्रस्ट बैठक में कई अहम फैसले, 22 जुलाई को होगी अगली बैठक, अफवाहों से बचने की अपील
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद बुलाई गई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। ट्रस्ट के न्यासी एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया। बैठक में ट्रस्ट की व्यवस्थाओं, चोरी की घटना, जांच की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी और कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। दोनों ने कहा कि चढ़ावा चोरी की घटना अत्यंत दुखद और लज्जाजनक है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा तथा ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय ने छोड़ा पद
स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय इस घटना से अत्यंत व्यथित थे। उनका मानना था कि जब तक चोरी के दोषियों की गिरफ्तारी और उन्हें दंड नहीं मिल जाता, तब तक उनके लिए महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी भावना से उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार त्यागपत्र सौंपे जाने के साथ ही उसे स्वीकार माना जाता है। वरिष्ठ न्यासी के. परासरन ने भी बैठक में यही संवैधानिक व्यवस्था स्पष्ट की।
कृष्ण मोहन बोले- कमियां दूर करेंगे, विश्वास बहाल करेंगे
कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि प्रबंधन और संचालन में जहां भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि इस घटना से समाज में ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है और लोगों के मन में अविश्वास का भाव उत्पन्न हुआ है। सभी न्यासी मिलकर ट्रस्ट की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को और मजबूत करेंगे।
उन्होंने कहा कि रामभक्तों द्वारा अर्पित प्रत्येक दान और वस्तु का पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। मीडिया से भी उन्होंने आग्रह किया कि सत्यापित तथ्यों को ही प्रकाशित किया जाए तथा ट्रस्ट के अधिकृत प्रतिनिधियों से जानकारी लेकर ही समाचार प्रसारित किए जाएं।
2800 दान की वस्तुओं का रजिस्टर सुरक्षित
स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि दान में मिली अनेक धार्मिक वस्तुएं भी गायब हैं। उन्होंने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि ट्रस्ट के पास रामायण, चरण पादुका सहित लगभग 2800 दान की वस्तुओं का विधिवत पंजीकृत रजिस्टर सुरक्षित है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत व्यक्तियों को इनका रिकॉर्ड भी दिखाया जाएगा।
‘चढ़ावा चोरी की आड़ में देशभर में भ्रम फैलाया जा रहा’
स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि चढ़ावा चोरी की घटना की आड़ में पूरे देश में जिस प्रकार का माहौल बनाया जा रहा है, उसके पीछे कुछ लोगों के इरादे साफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले रामभक्ति और राम मंदिर आंदोलन के विरोध में रहे, वही आज रामभक्तों को उपदेश देने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, जिन्होंने न्यायालय में भगवान श्रीराम के अस्तित्व और रामसेतु पर सवाल उठाए, वही आज रामभक्ति का दिखावटी ज्वार खड़ा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य हिंदू समाज और रामभक्तों के बीच अविश्वास और विभाजन पैदा करना है। ट्रस्ट ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगा।
अफवाहों से बचें, सीधे ट्रस्ट कार्यालय से करें संपर्क
स्वामी गोविंद देव गिरी ने रामभक्तों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या दुष्प्रचार पर विश्वास न करें। यदि किसी को मंदिर की किसी वस्तु, दान या व्यवस्था को लेकर कोई शंका है तो वह सीधे ट्रस्ट कार्यालय आकर जानकारी प्राप्त कर सकता है। अधिकृत व्यक्तियों को संबंधित अभिलेख और वस्तुओं का सत्यापन भी कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चोरी के दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड मिलेगा। एसआईटी जांच कर रही है और ट्रस्ट को न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। उन्होंने समाज से शांति, धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के भ्रम का हिस्सा न बनें।
22 जुलाई को फिर होगी ट्रस्ट की बैठक
स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित की जाएगी। तब तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने की संभावना है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और व्यवस्थागत सुधारों पर निर्णय लिया जाएगा। इसी दिन अन्य न्यासियों की नियुक्ति पर भी विचार किया जाएगा।
बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास सहित सभी सदस्य उपस्थित रहे, जबकि वरिष्ठ न्यासी के. परासरन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। बैठक के अंत में ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे तथा रामभक्तों से सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करने की अपील की गई।
‘चंपत राय की सबसे बड़ी गलती अपनों पर अत्यधिक विश्वास करना रहा‘


