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जनसुनवाई में डीएम के सख्त तेवर, दो राजस्व कर्मियों का वेतन रोका, लंबित शिकायतों पर एसडीएम व तहसील प्रशासन को लगाई फटकार

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जलालपुर, अंबेडकर नगर। जलालपुर तहसील में सोमवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी के तेवर सख्त नजर आए। जनसुनवाई के दौरान फरियादियों की लंबी कतार और एक ही शिकायत को लेकर बार-बार तहसील के चक्कर काटने को मजबूर लोगों को देखकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने उपजिलाधिकारी से प्रतिदिन आयोजित होने वाले जनता दर्शन में शिकायतों के प्रभावी निस्तारण पर सवाल उठाते हुए राजस्व विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

समाधान दिवस में कुल 111 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से मौके पर 9 मामलों का निस्तारण किया गया। कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग के दो कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए।

भाऊकुआं निवासी रमुनि ने सरकारी नाली, चकमार्ग और तालाब की भूमि (गाटा संख्या 832 व 833) पर दो बार पैमाइश होने के बावजूद अवैध कब्जा न हटाए जाने की शिकायत की। वहीं, तहसीलदार के आदेश के बाद भी फाइल लंबित रखने तथा शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर डीएम ने राजस्व कर्मी रमेश कनौजिया और डीएम न्यायालय में तैनात अजय शुक्ला के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए।

रतन निवासी सर्वेश यादव ने बंटवारे का मामला चार वर्ष से लंबित होने की शिकायत की। उसरहा निवासी राजेंद्र प्रसाद यादव ने बंजर भूमि पर वर्षों पुराने रास्ते को दीवार खड़ी कर अवरुद्ध किए जाने का मामला उठाया। जलालपुर कस्बा निवासी अजितुल निशा ने बताया कि विद्युत विभाग द्वारा ₹50 हजार जमा कराने के बाद भी ₹25 हजार की आरसी जारी कर दी गई।

वाजिदपुर निवासी 90 प्रतिशत दिव्यांग वकील अहमद ने समाज कल्याण विभाग से तीन वर्ष से ट्राईसाइकिल न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। मालीपुर थाना क्षेत्र के हाजीपुर निवासी रामअरज ने सीमांकन के बाद भी कब्जा न हटने की शिकायत की। वहीं, अवदान इस्माइलपुर निवासी विजय बहादुर ने तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा हटाने के बजाय लेखपाल द्वारा भ्रामक रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाया।

जिलाधिकारी ने पाया कि पिछले समाधान दिवसों में दिए गए कई प्रकरण दोबारा शिकायत के रूप में सामने आए हैं। इस पर उन्होंने तहसीलदार एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए सभी लंबित मामलों का शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक ही मामले में बार-बार शिकायतें आना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार, उपजिलाधिकारी राहुल कुमार गुप्ता, तहसीलदार निखिलेश कुमार तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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