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राष्ट्रीय पर्व नागरिक कर्तव्य और देशभक्ति को देते हैं नई ऊर्जा : डॉ. मनदर्शन

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अयोध्या। राष्ट्रीय पर्वों की आहट मात्र से ही मन और मस्तिष्क में उत्साह, उमंग और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना स्वतः जागृत होने लगती है। यह अनुभूति व्यक्ति को बचपन और स्कूली दिनों की याद दिलाती है, जब देशभक्ति से जुड़े नाट्य, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों में मन पूरी तन्मयता और उल्लास के साथ जुड़ जाता था। राष्ट्रीय पर्व वही स्मृतियां पुनर्जीवित कर व्यक्ति को मानसिक रूप से रोमांचित करते हैं।

डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

जिला चिकित्सालय के मनोविश्लेषक डॉ. आलोक मनदर्शन ने गणतंत्र दिवस के संदर्भ में जारी एक मनोविश्लेषणात्मक विज्ञप्ति में बताया कि राष्ट्रीय पर्व मनोविज्ञान की भाषा में पैट्रियॉटिक स्पिरिट या देशभक्ति-आवेग को प्रबल करते हैं। यह मनोदशा पर्व से कुछ दिन पहले प्रारंभ होकर पर्व के बाद भी कई दिनों तक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि यद्यपि देशभक्ति प्रत्येक नागरिक का स्थायी मनोभाव होती है, लेकिन राष्ट्रीय पर्व इसके लिए बूस्टर डोज का कार्य करते हैं।

डॉ. मनदर्शन के अनुसार इन भावनाओं के लिए जिम्मेदार मनोरसायनों में फील गुड हार्मोन सेरोटोनिन और रिवार्ड हार्मोन डोपामिन की अहम भूमिका होती है, जबकि उत्साह, उमंग और समर्पण का भाव उत्पन्न करने वाले एन्डोर्फिन का स्तर भी बढ़ जाता है। इसके साथ ही देशप्रेम से जुड़े मनोभावों के लिए जिम्मेदार ऑक्सीटोसिन के संवर्धन में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि राष्ट्रीय पर्व समाज में एकता, अखंडता और नागरिक कर्तव्य की भावना को मजबूती प्रदान करते हैं।

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