अयोध्या। सैन्य चिकित्सालय में आयोजित सैन्य–परिवारमनोस्वास्थ्यजागरूकताकार्यशाला में जिला अस्पताल के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोकमनदर्शन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही जरूरी है।
उन्होंने बताया कि चिंताकरनेवालेयाज्यादासोचनेवालेलोग अक्सर नकारात्मक विचारों में उलझे रहते हैं। इससे शरीर में स्ट्रेसहार्मोन (कार्टिसोलवएड्रेनालिन) बढ़ जाते हैं, जिसके कारण घबराहट, नींद न आना, दिल की धड़कन बढ़ना, पेट खराब रहना, सिरदर्द, थकान और बड़ी बीमारी का डर जैसे लक्षण सामने आते हैं। कई बार लोग बार-बार सफाई करने, जांच कराने या डॉक्टर के पास जाने जैसी आदतों से भी परेशान रहते हैं।
डॉ. आलोक ने बताया कि दिमाग के तीन हिस्से—प्रीफ्रंटलकॉर्टेक्स (सकारात्मकसोचऔरसंयम), एमिग्डाला (तनावकेंद्र) औरहिप्पोकैम्पस (स्मृतियोंकीलाइब्रेरी)—पर असर पड़ने से चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं होती हैं। जब हैप्पीहार्मोन (डोपामिन, ऑक्सीटोसिन, एंडॉर्फिन) और मूडस्टेबलाइज़रहार्मोनसेरोटोनिन की कमी हो जाती है, तो इंसान उदासी और हताशा से घिर जाता है।
उन्होंने कहा कि पर्सनालिटी डिसऑर्डर, नशा, पारिवारिक तनाव, डिजिटल एडिक्शन, ऑनलाइन गेम्स और लव-टकराव जैसी बातें स्थिति को और खराब कर देती हैं। उपचार के बारे में उन्होंने बताया कि एंटी-एंग्जायटी और सेरोटोनिन बढ़ाने वाली दवाएं तथा कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) बहुत कारगर होती हैं। कार्यशाला की अध्यक्षता कमांडिंगऑफिसररवींद्रकुमार ने की और संयोजन लेफ्टिनेंटप्रवेशशर्मा ने किया।