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करवा चौथ दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण बढ़ाने का पर्व : डॉ. आलोक मनदर्शन

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अयोध्या। आधुनिक दौर में तेजी से बदलते दांपत्य संबंधों के बीच करवा चौथ जैसे पारंपरिक पर्व का महत्व बढ़ गया है। यह पर्व पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, निष्ठा और समर्पण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह बातें जिला चिकित्सालय के माइंड मेंटर डॉ. आलोक मनदर्शन ने विश्व मनोजागरूकता माह अभियान के तहत मन कक्ष ऑडिटोरियम में आयोजित करवा चौथ पर जनमनोप्रभाव व्याख्यान में कहीं।

डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

डॉ. मनदर्शन ने कहा कि दांपत्य संबंधों में अविश्वास, आपसी मतभेद और संवाद की कमी कई बार मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और संबंधों में बिखराव का कारण बनती है। ऐसी परिस्थितियों में पारस्परिक समझ, भावनात्मक जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि करवा चौथ जैसे पर्व दंपतियों को अपने रिश्तों के महत्व को समझने और आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।


प्रेम और विश्वास को मजबूत करने में सहायक


डॉ. मनदर्शन के अनुसार, पर्व-त्योहारों से जुड़ी खुशी और उत्साह व्यक्ति के मन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। करवा चौथ पति-पत्नी के बीच भावनात्मक जुड़ाव, समर्पण और विश्वास को प्रोत्साहित करने का अवसर है। उन्होंने इसे आधुनिक जीवन में दांपत्य संबंधों को बेहतर बनाने वाली एक तरह की ‘लव स्टेबलाइजर थेरेपी’ बताया।

उन्होंने कहा कि खुशी और सकारात्मक भावनाओं से जुड़े सेरोटोनिन एवं डोपामिन जैसे रसायन मनोदशा को प्रभावित करते हैं। इसी तरह ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन भी भावनात्मक जुड़ाव तथा सुख की अनुभूति से जुड़े हैं। पारिवारिक परंपराओं और साझा अनुभवों के माध्यम से पति-पत्नी के बीच निकटता बढ़ सकती है।


रिश्तों में संवाद और समझ जरूरी


डॉ. मनदर्शन ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बदलते संबंधों, अलगाव, अविश्वास और पारिवारिक विवादों के कारण कई लोग मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता, आपसी संवाद और समस्याओं को समझदारी से सुलझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में प्रेम के साथ विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का होना आवश्यक है।

उन्होंने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की इस वर्ष की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वास्तविक जीवन के अनुभवों के बीच संबंध स्थापित करना महत्वपूर्ण है। प्रेम संबंधों में संघर्ष और पारिवारिक कलह से उत्पन्न मानसिक आघात का सामना कर रहे लोगों के प्रति समाज को संवेदनशील होना चाहिए।

डॉ. मनदर्शन ने कहा कि पारंपरिक पर्वों का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। ये पारिवारिक संबंधों को समय देने, भावनाओं को साझा करने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

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