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संस्कारों की सुरभि और प्रतिभा की गूंज से आलोकित हुआ जयपुरिया का वार्षिकोत्सव

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अयोध्या। सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल के वार्षिकोत्सव ‘गूंज’ में सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की ऐसी सुरमयी छटा बिखरी कि सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। नृत्य, गायन और वादन की विविध विधाओं में सजे इस आयोजन ने उपस्थित अभिभावकों  को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिक्षकों के सधे हुए मार्गदर्शन में छात्र–छात्राओं ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।



कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह रहीं, जो विद्यालय की संस्थापक अभिभावकों में से एक हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में जयपुरिया स्कूल के प्रो. धीरेन्द्र प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।

        नर्सरी के नन्हे बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘लिटिल बाल हनुमान’ और भगवती महाकाली द्वारा रक्तबीज वध की मनोहारी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण में भक्ति और ऊर्जा का संचार कर दिया। ‘नमो गणेशा—एकदंत विघ्नहर्ता’ पर 101 विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

          इंडो-वेस्टर्न और वेस्टर्न मूव्स डांस के माध्यम से माइकल जैक्सन को दी गई संगीतमय श्रद्धांजलि विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वहीं डांस का भूत और राजस्थानी लोक नृत्य ने भारतीय नृत्य परंपरा की जीवंत छवि प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने इंस्ट्रूमेंटल रॉकस्टार, सेमी-क्लासिकल, वेस्टर्न मूव सहित अन्य नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से कला की विविध रंगत दिखाई। इसके साथ ही ‘इल्तजा है समझाने की’ कव्वाली ने सभागार में समां बांध दिया। हॉरर कॉमेडी, हिडन पाथ ड्रामा तथा रेलवे मंडी हिंदी नाटक की सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रोमांच और संदेश दोनों से जोड़े रखा।



 इस अवसर पर मुख्य अतिथि रोली सिंह ने कहा कि वार्षिकोत्सव जैसे आयोजन बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का सशक्त मंच होते हैं। सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को संवेदनशील, सृजनशील और आत्मविश्वासी बनाती हैं।विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि प्रतिभाओं का जोश और उनके प्रदर्शन दर्शाते है कि यहां शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में प्रगति और सृजनशीलता का माध्यम बनती है।प्रो. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि कला, संस्कृति और संस्कारों के समन्वय से ही संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण होता है। निदेशक विशाल गुप्ता ने कहा कि आयोजन के माध्यम से हम बच्चों को अपनी कला, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ने का मौका देते हैं, जो उनके समग्र विकास में सहायक होते हैं। संचालन लिटिल मैथ्यू, सुमेरा जाफरी, हेड बॉय प्रखर तिवारी व हेड गर्ल श्रृष्टि पाण्डेय  पाण्डेय ने किया।



कार्यक्रम में विद्यालय की समन्वयक डॉ प्रगति श्रीवास्तव व प्रशासनिक अधिकारी सतीश नंदराज, फजलुर्रहमान, अजय जायसवाल,प्रदीप यादव ,अरु श्री गौड़, भावना श्रीवास्तव, योगिता श्रीवास्तव, रत्नेश मिश्रा, प्रसिथा के, लक्ष्मीकांत तिवारी, राजीव श्रीवास्तव, रिचा सिंह, थॉमी रिया, सोनी चतुर्वेदी, कोमल पांडे, साकेत श्रीवास्तव, माधुरी दुबे, अरुण कुमार पांडे, राम सागर, प्रिया गुप्ता, रेशमी मुरलीधरन, कृतांजलि सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे। समापन पर विद्यालय प्रबंधन ने अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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