◆ एक साल पहले भेजा गया प्रस्ताव अब तक लंबित, मुख्य द्वार पर गायब हैं पाइप लाइनें
अयोध्या। जयपुर के अस्पताल हादसे ने एक बार फिर स्वास्थ्य संस्थानों की अग्नि सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अयोध्या का जिला महिला अस्पताल भी इससे अछूता नहीं है। अस्पताल का फायर सिस्टम पिछले एक साल से अधूरा पड़ा है और इसके लिए करीब 70 लाखरुपयेकाप्रस्ताव अब तक स्वीकृति की प्रतीक्षा में है।
झांसी मेडिकल कॉलेज में आग की घटना के बाद पूरे प्रदेश में फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराए गए थे। इसी क्रम में अयोध्या के महिला अस्पताल में भी अग्निशमन विभाग और विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने निरीक्षण किया था। दोनों विभागों ने आवश्यक उपकरणों की सूची तैयार की थी, जिसका अनुमानित खर्च 70 लाख रुपये बताया गया था। यह प्रस्ताव करीब एक वर्ष पूर्व महानिदेशालय को भेजा गया, परंतु अभी तक अनुमोदन नहीं मिला है।
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं, वहीं एसएनसीयू वार्ड में दर्जनों नवजात शिशु इलाजाधीन रहते हैं। ऐसे में फायर सिस्टम का पूर्ण रूप से कार्यशील होना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगे फायर पैनल में पाइप लाइन तक नहीं लगी है, जिससे किसी आकस्मिक स्थिति में आग पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है।
सीएमएस डॉ. विभा कुमारी का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने अपनी ओर से कई छोटे सुधार कार्य किए हैं, लेकिन संपूर्ण फायर फाइटिंग सिस्टम के लिए स्वीकृति और बजट मिलना जरूरी है।