✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
देवभूमि की पावन धरती पर शुक्रवार की सुबह एक नई ऊर्जा और नए उत्साह के साथ हमारा स्वागत कर रही थी। पिछली शाम की लंबी यात्रा की थकान शरीर पर तारी अवश्य थी, लेकिन मन में माँ गंगा के पावन दर्शन और स्नान का उत्साह कहीं अधिक था।
उत्तराखंड में लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा के पश्चात जब हम लगभग सात बजे नीलकंठ होटल पहुँचे, तब सभी साथियों के चेहरों पर थकावट स्पष्ट दिखाई दे रही थी। कोई अपने कमरे में सामान व्यवस्थित कर रहा था तो कोई थोड़ी देर के लिए विश्राम कर रहा था। इसी बीच व्हाट्सएप समूह पर इन्द्रजीत शुक्ल का संदेश आया “सभी साथी तैयार होकर नीचे आ जाएँ। चाय-नाश्ते के उपरांत हम सभी माँ गंगा के पावन स्नान के लिए प्रस्थान करेंगे।”
यह संदेश पढ़ते ही मानो पूरे दल में नई चेतना का संचार हो गया। कुछ ही देर में सभी साथी तैयार होकर होटल के प्रांगण में एकत्र हो गए। होटल की गर्मागर्म और स्वादिष्ट चाय ने यात्रा की सारी थकान दूर कर दी। हल्के नाश्ते के बाद तीनों वाहनों में बैठकर हम सब हरिद्वार के प्रसिद्ध सर्वानंद घाट की ओर चल पड़े।
घाट पर पहुँचते ही सामने माँ गंगा का दिव्य और अलौकिक स्वरूप देखकर मन श्रद्धा से भर उठा।
हिमालय से उतरकर आने वाली गंगा की निर्मल, शीतल और वेगवती धारा मानो सभी को अपनी ओर बुला रही थी। जैसे ही हमने गंगा के पावन जल को स्पर्श किया, भीतर तक एक अद्भुत शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव हुआ। ऐसा लगा मानो वर्षों की थकान, तनाव और जीवन की भागदौड़ इस पवित्र धारा में बह गई हो।
