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स्लोगन व नेमप्लेट लगाने के नाम पर ठगी का खेल, ग्राम प्रधान की सतर्कता से पकड़ा गया फर्जी युवक

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ayodhya samachar

अंबेडकर नगर। टांडा विकास खंड क्षेत्र में स्लोगन और नेमप्लेट लगाने के नाम पर गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से पचास–पचास रुपए की वसूली करने का मामला प्रकाश में आया है। ठगों ने खुद को सरकारी ठेकेदार बताकर लोगों को गुमराह किया और दस्तावेजों में जिलास्तरीय अधिकारियों की मोहर व हस्ताक्षर की नकल कर गांवों में भ्रम फैलाया। मामला खुलने पर एक युवक को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

मामला तब उजागर हुआ जब अवसानपुर ग्राम पंचायत में प्रधान प्रतिनिधि गप्पू यादव उर्फ विद्यासागर ने फर्जी पत्र लेकर आए युवक की गतिविधियों पर शक जताते हुए उच्चाधिकारियों से संपर्क किया। जांच में पता चला कि शासन की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। प्रधान ने न केवल गांव को ठगी से बचाया बल्कि अन्य ग्राम सभाओं को भी सतर्क किया।


सुनियोजित तरीके से रचा गया था फर्जीवाड़ा


जानकारी के मुताबिक, बिहार से आए कुछ युवकों ने सबसे पहले जिलाधिकारी को एक पत्र जनता दर्शन में दिया। प्रक्रिया के तहत यह पत्र डीपीआरओ और फिर एडीओ पंचायत तक पहुंचा, जहां से कथित तौर पर आदेश संख्या 162 जारी कर दिया गया। इसी आदेश के आधार पर गांव-गांव जाकर नेमप्लेट और स्लोगन लगाने के नाम पर वसूली शुरू हुई।


ग्राम प्रधान की सूझबूझ से बची ठगी


जब आरोपी युवक अवसानपुर पहुंचे और ग्राम प्रधान से पत्र पर हस्ताक्षर व मोहर लगाने की मांग की, तो प्रधान को शक हुआ। तत्काल जिला अधिकारियों से बातचीत की गई और मामला फ्रॉड निकला। इसके बाद ग्राम प्रधान ने अन्य गांवों को सतर्क किया। इसी क्रम में महेशपुर ग्राम पंचायत में ग्रामीणों ने एक अन्य युवक को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।


एडीओ पंचायत ने दी तहरीर


एडीओ पंचायत अखिलेश गोंड ने बताया कि उनके द्वारा जारी पत्र को 31 जुलाई को ही निरस्त कर दिया गया था, जब उन्हें मामला संदिग्ध लगा। उनके अनुसार, ठग पप्पू सिंह पुत्र जगदीश सिंह निवासी केवड़ी, जिला केवरही (बिहार) और कृष्णा सिंह नामक व्यक्ति ने सरकारी आदेश का झूठा हवाला देकर वसूली की थी। इनके खिलाफ इब्राहिमपुर थाने में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।


प्रशासन भी आया हरकत में


इस मामले को लेकर बीडीओ टांडा राघवेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि स्लोगन और नेमप्लेट लगाने की कोई सरकारी योजना नहीं है। संबंधित एडीओ पंचायत से स्पष्टीकरण मांगा गया है और ठगी में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डीपीआरओ ने कहा कि शासन स्तर से इस तरह की कोई योजना नहीं चल रही है और न ही उनके द्वारा कोई आदेश जारी किया गया है। बीडीओ टांडा को मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।

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