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इम्प्टी-नेस्ट सिंड्रोम से बढ़ सकता है बुजुर्गों में अकेलापन और अवसाद का खतरा

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◆ स्नेह और पारिवारिक जुड़ाव बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी


अयोध्या। सामाजिक और पारिवारिक अलगाव बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। बच्चों के घर से दूर चले जाने के बाद उत्पन्न अकेलापन, सेवानिवृत्ति, जीवनसाथी का निधन, स्थान परिवर्तन और आत्महीनता जैसी परिस्थितियां वृद्धावस्था में अवसाद और चिंता का कारण बन सकती हैं। समय रहते पहचान और उपचार न होने पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।

वृद्धजन अंतर्राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में आयोजित ‘वृद्धजन आत्मघाती मनोदशा’ विषयक जेरियाट्रिक मेंटल हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनो परामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में अवसाद, चिंता तथा संज्ञानात्मक गिरावट जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखी जाती हैं। संज्ञानात्मक गिरावट में स्मृति और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अल्जाइमर और उससे जुड़े मनोभ्रंश इसके प्रमुख रूपों में शामिल हैं। इसके अलावा नशे की समस्या, सिजोफ्रेनिया और डेलीरियम जैसी स्थितियां भी वृद्धावस्था में सामने आ सकती हैं।

डॉ. मनदर्शन के अनुसार मधुमेह, हृदय रोग और गठिया जैसी दीर्घकालिक शारीरिक बीमारियां भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं पारिवारिक अलगाव से उत्पन्न अकेलापन अवसाद के जोखिम को बढ़ा सकता है। बच्चों के घर से दूर रहने अथवा परिवार में संवाद और जुड़ाव कम होने की स्थिति को इम्प्टी–नेस्ट सिंड्रोम (खाली घोंसला सिंड्रोम) के संदर्भ में समझा जाता है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की मानसिक परेशानियों की समय पर पहचान, चिकित्सकीय उपचार और परिवार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। परिवार से भावनात्मक जुड़ाव, सम्मान और नियमित संवाद बुजुर्गों में सकारात्मकता और जीवन के प्रति उत्साह बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। मानसिक संकट के संकेत दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की जरूरत है।

कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बुजुर्गों के पुनर्वास में चिकित्सा उपचार के साथ पारिवारिक और सामाजिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य आरसी पाण्डेय ने की। संयोजन सियाशरण पालिया ने किया। कार्यशाला में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।

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