Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या NEET छात्र आंदोलन पर डॉ. मनदर्शन की राय, विरोध और उन्माद में...

NEET छात्र आंदोलन पर डॉ. मनदर्शन की राय, विरोध और उन्माद में अंतर समझने की जरूरत

0

अयोध्या। जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा है कि धरना, प्रदर्शन और आंदोलन जैसी सामाजिक गतिविधियां तब सामने आती हैं, जब किसी वर्ग के साथ अन्याय, शोषण या अधिकारों के हनन की भावना पैदा होती है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों के बीच समानुभूति और एकजुटता विकसित होती है, जो आगे चलकर विरोध प्रदर्शन का रूप ले सकती है।

डॉ. मनदर्शन ने बताया कि किसी घटना के बाद तनाव की स्थिति में शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति और समूह दोनों स्तर पर प्रतिक्रिया की भावना बढ़ती है। यही मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया कई बार आंदोलन और प्रदर्शन के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध अपनी बात रखने का एक वैध माध्यम है और इससे लोगों के मन में दबा असंतोष व्यक्त करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि भारत में सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता के कारण विभिन्न मुद्दों पर समय-समय पर आंदोलन होते रहते हैं। हालांकि उन्होंने युवाओं से अपील की कि विरोध प्रदर्शन के दौरान मर्यादा और शालीनता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि बेबाकी और अभद्रता में अंतर समझना आवश्यक है तथा आंदोलन के दौरान गाली-गलौज, अश्लील भाषा और अराजक व्यवहार से बचना चाहिए।

डॉ. मनदर्शन ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान कुछ स्थानों पर अनुशासनहीनता और असंयमित व्यवहार भी देखने को मिला, जो चिंता का विषय है। उनके अनुसार युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति भी ऐसे व्यवहार का एक कारण हो सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता तभी सार्थक मानी जाती है, जब वह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से अपने उद्देश्य को प्राप्त करे।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version