अयोध्या। नेपाल की ओर से छोड़े गए पानी के बाद अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से अयोध्या के प्रसिद्ध गुप्तार घाट की सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं, जबकि घाट के गुंबद भी पानी से घिर गए हैं। तटीय और निचले इलाकों में लगातार बढ़ते पानी से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है।
सरयू के बढ़ते जलस्तर का असर ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। सोहावल तहसील के माझा कला गांव में बाढ़ का पानी भर गया है। गांव की सड़कें जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ के कारण बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो गया है और लोगों को घरों से निकलने में परेशानी हो रही है।
स्टीमरबंदहोनेकाग्रामीणोंनेलगायाआरोप
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने राहत और बचाव की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आवाजाही के लिए लगाए गए स्टीमर पिछले दो दिनों से ईंधन नहीं मिलने के कारण बंद हैं। इससे बाढ़ की स्थिति में लोगों की आवाजाही और आपातकालीन जरूरतों को लेकर परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने राशन और पशुओं के चारे की समस्या का भी दावा किया है। उनका कहना है कि सभी प्रभावित परिवारों तक राशन किट नहीं पहुंच पा रही है। वहीं मवेशियों के लिए भूसे की भी कमी बनी हुई है।
डीएमबोले– राहतऔरबचावकार्यसुचारू
ग्रामीणों के आरोपों के बीच जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने प्रशासन की व्यवस्थाओं को दुरुस्त बताया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में राशन किट वितरित की जा रही हैं। पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी की गई है। आवश्यकता के अनुसार नावों का संचालन कराया जा रहा है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।
एकदर्जनसेअधिकगांवबाढ़कीचपेटमें
सरयू के बढ़ते जलस्तर से जिले की रुदौली, सोहावल और सदर तहसील के एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। निचले इलाकों में पानी बढ़ने के साथ प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। राहत और बचाव टीमों को सक्रिय रखा गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव संसाधनों को प्रभावित इलाकों में भेजा जा रहा है।