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प्रशासनिक पदों अस्थायी नियुक्तियों से कृषि विश्वविद्यालय में असंतोष, वरिष्ठता दरकिनार करने के आरोप

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अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज में लंबे समय से बड़े प्रशासनिक पदों पर अस्थायी नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुलपति द्वारा मनमाने ढंग से अपने करीबी शिक्षकों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, जबकि वरिष्ठ प्रोफेसरों की अनदेखी की जा रही है। इस कार्यप्रणाली से विश्वविद्यालय में असंतोष का माहौल बन गया है।

प्रसार शिक्षा विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. आर. के. दोहरे ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. दोहरे वर्ष 2011 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नत हुए और वर्तमान वरिष्ठता सूची में तीसरे स्थान पर हैं, इसके बावजूद उन्हें अब तक कोई प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

डॉ. दोहरे के अनुसार प्रसार निदेशक डॉ. ए.पी. राव के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें यह दायित्व दिए जाने की अपेक्षा थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2024 में प्रोफेसर पद पर चयनित डॉ. आर.बी. सिंह (सब्जी विज्ञान विभाग) को प्रसार निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। जबकि वरिष्ठता सूची में डॉ. आर.बी. सिंह का स्थान 53वां है और वे उनसे करीब 13 वर्ष कनिष्ठ हैं। डॉ. दोहरे ने इसे अपने साथ किया गया उत्पीड़न बताया है। विश्वविद्यालय में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां डॉ. दोहरे से कनिष्ठ प्रोफेसरों को महत्वपूर्ण पद सौंपे गए हैं। साल 2015 में चयनित डॉ. सुशांत श्रीवास्तव (वरिष्ठता सूची में आठवें स्थान) के पास निदेशक प्रशासन का प्रभार है। साल 2016 में चयनित डॉ. साधना सिंह (दसवां स्थान) डीन, जबकि डॉ. भानु प्रताप (बारहवां स्थान) डीन गोंडा बनाए गए हैं। इसके अलावा डॉ. देवाशीष नियोगी (14वां) डीएसडब्ल्यू, डॉ. सुबोध कुमार (16वां) पुस्तकालयाध्यक्ष, डॉ. सी.पी. सिंह (17वां) डीन फिशरीज के पद पर कार्यरत हैं। साल 2017 में प्रोफेसर बने डॉ. सीताराम मिश्रा (33वां) संपत्ति अधिकारी, 2020 में प्रोफेसर बने डॉ. शंभू प्रसाद (34वां) शोध निदेशक तथा 2022 में प्रोफेसर बने डॉ. उमेश चंद्र (44वां) संयुक्त निदेशक बीज बनाए गए हैं। हाल ही में 2024 में प्रोफेसर बने डॉ. अनिल कुमार को नियुक्ति प्रभारी तथा डॉ. नवीन चंद्र शाही को डीन इंजीनियरिंग का दायित्व दिया गया है।

डॉ. दोहरे का कहना है कि वरिष्ठ प्रोफेसर होने के नाते उन्होंने देश के कई कृषि विश्वविद्यालयों में कुलपति पद के लिए आवेदन किया है और कई जगहों पर उनका नाम पैनल में भी शामिल हुआ है। बावजूद इसके उन्हें किसी वरिष्ठ प्रशासनिक पद का दायित्व न दिया जाना उनके अनुसार जानबूझकर उनके बायोडाटा को प्रभावित करने का प्रयास है।

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