अयोध्या। पीस पार्टी के पदाधिकारियों ने अपनी कई मांगों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। जिला अध्यक्ष अजमुद्दीन के नेतृत्व में दर्जनों पदाधिकारियों ने तहसील परिसर में जुटकर यह ज्ञापन सौंपा।
जिला अध्यक्ष अजमुद्दीन ने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में 1936 तक तथा स्वतंत्रता संग्राम के बाद अनुसूचित जातियों में सभी धर्मों के लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिया जाता था। लेकिन, 10 अगस्त 1950 के संवैधानिक आदेश में ‘हिंदू’ शब्द जोड़कर मुस्लिम समुदाय को इससे बाहर कर दिया गया, जो एक बड़ा संवैधानिक अन्याय था।
उन्होंने बताया कि 1956 में सिख धर्म और 1990 में बौद्ध धर्म की अनुसूचित जातियों को एससी आरक्षण में शामिल किया गया, लेकिन मुस्लिम समुदाय की अनदेखी जारी रही। जस्टिस सच्चर समिति (2006) और जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग (2007) ने अपनी रिपोर्ट में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को अनुसूचित जातियों से भी बदतर बताया और उन्हें एससी श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई।
अजमुद्दीन ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा 2023 में गठित जस्टिस के.जी. बालकृष्णन आयोग ने भी इस मुद्दे को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि “सामाजिक न्याय की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियां मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में देखती हैं।”
पीस पार्टी ने मांग की है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मुस्लिम अनुसूचित जातियों को तुरंत एससी श्रेणी में शामिल कर आरक्षण का लाभ दिया जाए।
इस मौके पर युवा जिला अध्यक्ष मोहम्मद जीशान, महासचिव अबरार गुड्डू, जिला उपाध्यक्ष जहीर खान, मंडल अध्यक्ष ताज मोहम्मद, मुन्ना पार्षद, सलीम, जिला उपाध्यक्ष इरफान और सचिव चांद अहमद मौजूद रहे।