जलालपुर, अंबेडकर नगर। विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर आउटसोर्स कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा दो दिवसीय धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत 13 अगस्त से सभी जिलों में संविदा कर्मी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों ने सरकार और विभागीय प्रबंधन पर पूर्व में दिए गए आश्वासनों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए जल्द मांगें पूरी करने की मांग की।
धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारियों ने कहा कि बढ़ते कार्यभार के बावजूद पिछले दो वर्षों में लगभग 25 हजार संविदा कर्मियों की छंटनी कर दी गई है। वर्ष 2023 की हड़ताल के दौरान कार्य करने के बावजूद हटाए गए कर्मचारियों को ऊर्जा मंत्री एवं विभागीय प्रबंधन द्वारा बहाली का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें पुनः सेवा में नहीं लिया गया है। कर्मचारियों ने सरकार द्वारा गठित आउटसोर्स निगम में ऊर्जा निगमों के सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को शामिल न किए जाने पर भी नाराजगी जताई।
महासंघ ने मांग की कि बिजली विभाग के सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को आउटसोर्स निगम में शामिल किया जाए, संविदा कर्मियों की छंटनी पर तत्काल रोक लगे तथा हटाए गए कर्मचारियों की शीघ्र बहाली की जाए। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तर्ज पर शिफ्टवार ड्यूटी लागू करने, फील्ड कर्मचारियों के लिए फेसियल अटेंडेंस व्यवस्था समाप्त करने, सेवानिवृत्ति आयु 55 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने, घायल कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों को पेट्रोल भत्ता तथा सेवाकाल में मृत्यु होने पर आश्रितों के लिए 20 लाख रुपये का बीमा लागू करने की भी मांग की गई।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। धरने में अभिषेक मिश्रा, पतीराम, पंकज कुमार, विनय पटेल, बलवंत यादव सहित बड़ी संख्या में संविदा कर्मी मौजूद रहे। वहीं, विद्युत उपकेंद्र के अधिशासी अभियंता झब्बू लाल ने बताया कि संविदा कर्मियों की हड़ताल से विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था के संचालन और राजस्व संग्रहण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।