अयोध्या। मानसून सिर पर है, लेकिन नगर निगम की नाला सफाई व्यवस्था की हकीकत मंगलवार को उस समय सामने आ गई, जब महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार स्वयं राम की पैड़ी क्षेत्र में निरीक्षण के लिए पहुंचे। गांधी आश्रम के सामने नाले में निर्माण कार्य का मलबा फंसा मिला और चैंबर ओवरफ्लो होने से जलभराव जैसी स्थिति बन गई। महापौर के निर्देश पर अधिकारियों को मौके पर ही जेसीबी बुलाकर सफाई करानी पड़ी।
नगर निगम एक ओर 60 प्रतिशत नालों की सफाई पूरी होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रमुख धार्मिक क्षेत्र राम की पैड़ी पर ही नालों में मलबा और गंदगी मिलने से इन दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि समय रहते निरीक्षण नहीं होता तो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती थी।
निरीक्षण के दौरान नगर निगम की सफाई व्यवस्था की एक और बड़ी खामी सामने आई। नालों की सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट और कचरा कई स्थानों पर नालों के किनारे ही छोड़ दिया गया था। ऐसे में बारिश होने पर यही सिल्ट और कचरा दोबारा नालों में बह सकता है, जिससे सफाई अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थिति देखकर नगर आयुक्त ने अधिकारियों को तत्काल सिल्ट उठाने, तलीझाड़ सफाई सुनिश्चित करने और चेतावनी दी कि वर्षा ऋतु के दौरान दोबारा सिल्ट या कचरा जमा मिलने पर संबंधित विभाग को फिर से सफाई करनी होगी। इससे साफ है कि अब तक की गई सफाई के स्थायी और प्रभावी होने पर खुद नगर निगम को भी भरोसा नहीं है।
निर्माण कार्य के मलबे का नाले में जाने से रोकने के लिए नियमित निगरानी के निर्देश
महापौर ने निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे को नालों में जाने से रोकने के लिए नियमित निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही साफ शब्दों में कहा कि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित नाला सफाई कार्य पूरे किए जाएं। नगर आयुक्त ने भी चेतावनी दी कि वर्षा ऋतु के दौरान यदि किसी नाले में दोबारा सिल्ट या कचरा जमा मिलता है तो संबंधित विभाग को दोबारा सफाई करानी होगी।
निरीक्षण के दौरान जोनल अधिकारी अशोक गुप्त, सहायक अभियंता राजपति यादव, सहायक अभियंता जलकल जयकुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।