◆ अधिकार स्पष्ट न होने से विकास कार्यों की गति पर असर
अयोध्या । प्रदेश सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रशासक का दायित्व सौंप दिया है। इससे पहले ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त किया जा चुका है। 19 जुलाई को जारी आदेश के बाद ब्लॉक प्रमुखों ने भी प्रशासकीय जिम्मेदारी संभाल ली है।
हालांकि, कार्य संचालन को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। शासन की ओर से विस्तृत गाइडलाइन जारी न होने के कारण कई नियमित प्रशासनिक और विकास कार्य लंबित हैं। प्रशासक भी अधिकारों और दायित्वों के संबंध में स्पष्ट निर्देश मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जानकारों के अनुसार प्रदेश में पहली बार निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को ही प्रशासक बनाया गया है। ऐसे में शासन अलग से दिशा–निर्देश तैयार कर रहा है। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि प्रशासक किन मामलों में निर्णय ले सकेंगे और किन विषयों पर शासन की अनुमति आवश्यक होगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह ने बताया कि उन्हें 12 जुलाई को प्रशासक नियुक्त किए जाने का आदेश मिल चुका है। लेकिन अब तक कार्यों के संचालन संबंधी कोई गाइडलाइन प्राप्त नहीं हुई है। शासन से दिशा–निर्देश मिलने के बाद उसी के अनुरूप कार्य किए जाएंगे।
ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष शिवेंद्र सिंह ने बताया कि ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक बनाए जाने का आदेश मिल गया है। शासन की गाइडलाइन जारी होते ही विकास योजनाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों का संचालन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शुरू किया जाएगा।