जलालपुर अंबेडकरनगर। जलालपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत बडेपुर में ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव की कथित मिलीभगत से लाखों रुपये के गबन का मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि जांच के बाद ब्लॉक स्तर के अधिकारी ग्राम प्रधान व सचिव को बचाने में जुटे हुए हैं, जिससे यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है।
गांव के शिकायतकर्ता सुनील कुमार व सतीश पटेल ने इस संबंध में जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने जलालपुर के खंड विकास अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गठित जांच टीम—जिसमें एडीओ पंचायत, एडीओ एमआई तथा वर्तमान ग्राम सचिव शामिल थे—ने उन्हें बिना सूचना दिए ग्राम प्रधान व पूर्व ग्राम सचिव को पक्षकार बनाते हुए मात्र एक घंटे में औपचारिकता निभाकर जांच पूरी कर ली।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्ट्रीट लाइट के नाम पर लगभग 4 लाख 98 हजार रुपये तथा हैंडपंप रिपेयर व मरम्मत के नाम पर करीब 15 लाख रुपये की धनराशि का दुरुपयोग किया गया। इसके अलावा बिना लाल गिट्टी के इंटरलॉकिंग कार्य, पुराने नाले को नया दिखाकर, तथा पुरानी पटिया लगाकर लंबा-चौड़ा बजट बनाकर धन आहरण करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
वहीं इस मामले में एडीओ पंचायत बृजेश तिवारी का कहना है कि जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें शिकायतें सही पाई है। हालांकि जांच रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों के बीच शिकायतकर्ताओं ने पुनः जिलाधिकारी से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच अधिकारियों ने मूल शिकायतों की जांच करने के बजाय अन्य बिंदुओं पर ध्यान दिया और ग्राम प्रधान व सचिव को बचाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों द्वारा की गई जांच से उन्हें न्याय मिलना संभव नहीं है, इसलिए मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।