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होली पर ‘हग’ से बढ़ता है प्रेम, नशे व उन्माद से बचने की जरूरत: डॉ. आलोक मनदर्शन

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अयोध्या। होली केवल रंगों और मस्ती का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर है। जिला चिकित्सालय के मन-कक्ष में आयोजित होली-पर्व जनित मनो-जागरूकता कार्यशाला में मनोपरामर्शदाता डॉ आलोक मनदर्शन ने कहा कि होली पर गले मिलना यानी ‘होली-हग’ प्रेम और विश्वास को बढ़ाता है।

डा आलोक मनदर्शन
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या

उन्होंने बताया कि खुश होकर रंग खेलने और आपस में मिलने-जुलने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन बढ़ता है, जिससे मन प्रसन्न रहता है। वहीं गले मिलने से ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है, जो आपसी विश्वास और अपनापन बढ़ाता है। इससे मन में जमा पुरानी नाराजगी और तनाव भी कम हो सकता है।

हालांकि उन्होंने सावधान करते हुए कहा कि होली की मस्ती कभी-कभी उन्माद का रूप ले लेती है। तेज संगीत, भीड़ और नशे के कारण कुछ लोग अपना नियंत्रण खो देते हैं। डोपामिन हार्मोन की अधिकता से आक्रामक या अशोभनीय व्यवहार की स्थिति बन सकती है।

डॉ. मनदर्शन ने कहा कि जिन किशोरों और युवाओं में पहले से अवसाद, व्यक्तित्व विकार या मानसिक तनाव की समस्या हो, उनमें ऐसी स्थिति की आशंका अधिक रहती है। नशीले पदार्थ इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार रखें, उन पर नजर रखें और यदि असामान्य व्यवहार या नशे की आदत दिखे तो तुरंत मनोपरामर्श लें। होली का पर्व स्वस्थ आनंद और प्रेम का संदेश देने वाला बने, यही सभी का प्रयास होना चाहिए।

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