अयोध्या। सावन के झूले, रिमझिम फुहारें और कजरी गीतों की मधुर गूंज… इस दृश्य ने मंगलवार को पूरी अयोध्या को सौभाग्य और श्रद्धा के रंगों से सराबोर कर दिया। अखंड दांपत्य सुख और पति की दीर्घायु की कामना से जुड़ा कजरीतीज का पावन पर्व यहां बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया गया।
सुबह से ही महिलाएं श्रृंगार सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ी रहीं। हाथों में मेंहदी, मांग में सिंदूर और पैरों में आलता सजाए सुहागिनें शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना में लीन दिखीं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था, तब प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाया। उसी तपस्या की स्मृति स्वरूप यह व्रत आज भी सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।
पूरे दिन निर्जल रहकर व्रती महिलाओं ने भोलेनाथ और मां पार्वती का स्मरण किया। संध्या बेला में जब चंद्रमा उदित हुआ तो व्रतिनियों ने अर्घ्य अर्पित कर विधिवत पूजा संपन्न की। इसके बाद व्रत का पारण किया गया।
कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक कजरी गीतों की मधुर धुनों के साथ झूला झूलते हुए उत्सव का आनंद लिया। गीतों की गूंज और झूले की थिरकन ने वातावरण को और भी रूमानी बना दिया।
सुहानी सुबह से शुरू हुई रिमझिम बारिश ने पर्व की पावनता को और बढ़ा दिया। व्रती महिलाओं ने कहा कि कजरी तीज पर वर्षा होना शुभ संकेत माना जाता है, क्योंकि यह हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का द्योतक है।