अंबेडकर नगर। जिले के पारंपरिक और स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान दिलाने के लिए एक जनपद एक व्यंजन योजना के तहत मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यशाला आयोजित की गई। जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में उद्यमियों को योजना के प्रावधानों, वित्तीय सहायता, खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग और विपणन की जानकारी दी गई।
उपायुक्त उद्योग ने बताया कि योजना के तहत जिले के लिए बालूशाही, चाट, खजला और लाल गन्ने की गोटी को चिन्हित किया गया है। इन व्यंजनों के उत्पादन, सेवा और व्यापार से जुड़ी पात्र इकाइयों और उद्यमियों को नियमानुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
पांच करोड़ तक की परियोजना पर अनुदान
योजना के तहत 25 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर अधिकतम 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। 25 लाख से अधिक और 50 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर अधिकतम 20 प्रतिशत अनुदान का प्राविधान है। वहीं, 50 लाख से अधिक और पांच करोड़ रुपये तक की परियोजना लागत वाली इकाइयों को 10 प्रतिशत अथवा अधिकतम 50 लाख रुपये, जो भी कम हो, अनुदान दिया जाएगा।
इसके अलावा स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित मेलों, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में उत्पादों के प्रचार-प्रसार एवं विपणन के लिए भी नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
पैकेजिंग और खाद्य सुरक्षा की दी जानकारी
कार्यशाला में एक्सपर्ट विजय सिंह ने उद्यमियों को पैकेजिंग, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस, गुड हाइजीन प्रैक्टिस , पंजीकरण प्रक्रिया और खाद्य सुरक्षा मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षित पैकेजिंग के साथ आवश्यक पंजीकरण व मानकों का पालन करने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने कहा कि एक जनपद एक उत्पाद की तर्ज पर संचालित एक जनपद एक व्यंजन योजना से जिले के पारंपरिक व्यंजनों को व्यापक बाजार मिल सकेगा। उन्होंने पात्र उद्यमियों से योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने का आह्वान किया। कहा कि स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा मिलने से पारंपरिक उत्पादों की पहचान मजबूत होगी और रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी न्यायिक, सहायक आयुक्त खाद्य समेत संबंधित विभागों के अधिकारी और उद्यमी मौजूद रहे।