अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के उद्यमिता एवं व्यवसाय प्रबंधन विभाग में “मेंटल हेल्थ एंड सेक्सुअल एब्यूज” विषय पर आयोजित कार्यशाला में यौन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि यौन उत्पीड़न के अधिकांश मामलों में आरोपी अजनबी नहीं बल्कि परिचित, सहकर्मी या आसपास के लोग ही होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य करने वाले व्यक्ति अक्सर साइकोपैथिक या नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी अथवा अन्य मनोविकृतियों से ग्रसित होते हैं, जिनमें आक्रामकता, संवेदनहीनता, दुस्साहस और ग्लानि का अभाव पाया जाता है।
उन्होंने बताया कि बच्चों के यौन शोषण की प्रवृत्ति को पीडोफिलिया, विपरीत लिंग के अंगों को अनुचित तरीके से छूने की प्रवृत्ति को फ्राट्युरिज्म तथा चोरी-छिपे देखने की आदत को वायुरिज्म कहा जाता है। यौन उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति मानसिक आघात से गुजरते हैं, जिससे उनमें भय, शर्म, ग्लानि, अवसाद और कभी-कभी प्रतिशोध की भावना भी उत्पन्न हो सकती है।
डॉ. मनदर्शन ने कहा कि अश्लील चैटिंग, पोर्नोग्राफिक सामग्री साझा करना, अशोभनीय मजाक, पीछा करना, चोरी-छिपे ताक-झांक, गुप्त फोटो या वीडियो बनाना, बैड टच और बॉडी शेमिंग जैसे कृत्य भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए “पीओएसएच अधिनियम-2013” लागू किया गया है, जिसके तहत यौन उत्पीड़न की रोकथाम और निवारण के प्रावधान हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. शैलेन्द्र वर्मा ने की, जबकि संयोजन प्रो. हिमांशु सिंह और संचालन डॉ. राकेश कुमार ने किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।