अयोध्या। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। बुधवार को बल्लाहाता स्थित परमेश्वरी देवी मेमोरियल अस्पताल में कथित लापरवाही के चलते प्रसूता और नवजात की मौत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर क्यों बेहतर सुविधाओं से लैस जिला महिला अस्पताल के रहते हुए भी प्रसूताओं को निजी, गैर-मानक अस्पतालों की ओर धकेला जा रहा है।
स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि जिला महिला अस्पताल में दलाल तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। अस्पताल पहुंचने वाली प्रसूताओं के तीमारदारों को बहला-फुसलाकर आसपास के निजी नर्सिंग होम में भेज दिया जाता है, जहां हर मरीज पर मोटा कमीशन तय रहता है। इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर के बाहर निजी एंबुलेंसों का जमावड़ा इस कदर रहता है कि सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा भी बौनी साबित हो रही है।
मामले में कार्रवाई करते हुए एडिशनल सीएमओ आशुतोष श्रीवास्तव ने संबंधित अस्पताल को सील कर दिया है। उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, महिला अस्पताल के अधीक्षक से वार्ता के बाद विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
घटना के बाद सपा के पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे पवन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने जिला महिला अस्पताल के डॉक्टरों और निजी अस्पतालों के बीच साठगांठ का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सीधा-सीधा मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मजबूरन मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां गलत तरीके से प्रसव कराए जाते हैं और जान जोखिम में डाल दी जाती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में संबंधित नर्सिंग होम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने, एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और अस्पताल को स्थायी रूप से बंद करने की मांग की।
परमेश्वरी देवी मेमोरियल अस्पताल पहले भी सील हो चुका है, इसके बावजूद दोबारा संचालन होना प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक दलालों और ऐसे अस्पतालों के गठजोड़ के चलते मासूम जिंदगियां यूं ही दम तोड़ती रहेंगी?