◆ 350वें बलिदान दिवस पर आर्पित की गई श्रद्धांजलि
अयोध्या। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर रविवार को साकेतनिलयम, संघ कार्यालय देवकाली बाइपास में श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण समारोह आयोजित किया गया। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब सेवा समिति, अयोध्या के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की स्थापना की गई तथा शब्द-कीर्तन के साथ गुरुवाणी का रसपान कराया गया।
समारोह की शुरुआत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत प्रचारक कौशल जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को अपने सिर पर उठाकर गुरु आसन तक पहुंचाया। इस दौरान नगर निगम अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी द्वारा पुष्प वर्षा की गई। समिति की ओर से गुरु तेग बहादुर के जीवन पर आधारित परिचय पत्रक वितरित किए गए तथा श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर की व्यवस्था की गई।
गुरु तेग बहादुर मानवता के प्रहरी – चम्पत राय
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता के सबसे बड़े रक्षक थे। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने न केवल अपने धर्म बल्कि दूसरों के धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश दे दिया, परंतु झुकाया नहीं। इसलिए उन्हें ‘हिन्द की चादर’ कहा जाता है। ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1675 में औरंगजेब द्वारा जबरन धर्मांतरण किए जाने के विरोध में गुरु जी दिल्ली पहुंचे और प्रताड़नाओं के बावजूद न झुके, न विचलित हुए। चम्पत राय ने बताया कि भाई मतिदास, भाई सतिदास और भाई दयाला के सामने क्रूर अत्याचार किए गए, परंतु गुरु जी शांत और दृढ़ रहे तथा अंततः 24 नवम्बर 1675 को चांदनी चौक में शहीद कर दिए गए। उन्होंने कहा कि गुरु जी के बलिदान ने लाखों हिन्दुओं को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाया। उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है — सिर दिया, पर धर्म नहीं छोड़ा।
कार्यक्रम में श्रीमद् जगद्गुरु अर्जुनद्वाराचार्य स्वामी कृपालु रामभूषण देवाचार्य महाराज, बावन मंदिर पीठाधीश्वर महंत वैदेही बल्लभ शरण, डॉ. भरत दास उदासीन, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, भाजपा पदाधिकारी, संघ के विभिन्न स्तरों के कार्यकर्ता तथा कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी विशिष्ट अतिथियों का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया।