अयोध्या। जिला कारागार फैजाबाद–अयोध्या के शहीद कक्ष में सोमवार को उस इतिहास की झलक दिखाई दी, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा बदल दी थी। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों की प्रदर्शनी ने वहां मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन अशफाक उल्लाह खां मेमोरियल शहीद शोध संस्थान के सहयोग से किया गया। सुबह 10 बजे जेलर राजेंद्र कुमार यादव ने क्रांतिकारी अशफाक उल्लाह खां की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस दौरान वातावरण में देशभक्ति का भाव रचने लगा।
संस्थान के प्रबंध निदेशक सूर्यकांत पांडेय ने कहा,कि यह प्रदर्शनी केवल अभिलेख दिखाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को क्रांतिकारियों की विचारधारा और उनके त्याग से परिचित कराने का प्रयास है। आजादी आंदोलन के मूल्य कहीं धुंधले न पड़ जाएं, इसलिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं। प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने कहा, कि काकोरी के वीरों ने अपने प्राणों से देश की स्वतंत्रता के सपनों को शक्ति दी। ऐसी प्रदर्शनी नियमित रूप से होनी चाहिए ताकि युवा जान सकें कि आजादी किस कीमत पर मिली है।
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक एवं भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के शोधकर्ता डॉ. शाह आलम राना ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित अभिलेखों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कारागार परिसर में अशफाक उल्लाह खां की बैरक के सौंदर्यीकरण और संरक्षण की आवश्यकता जताई। इस दौरान चंद्रेश भारद्वाज ने भावपूर्ण देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिसने माहौल और भी भावनात्मक बना दिया।
ऐतिहासिक अभिलेखों ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में प्रदर्शित दस्तावेजों में शामिल थे—
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काकोरी षड्यंत्र मामले का जजमेंट रिकॉर्ड
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प्रिवी काउंसिल लंदन में दायर अपील फाइलें
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अशफाक उल्लाह खां का छात्र रजिस्टर और हस्तलिखित डायरी
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काकोरी ट्रेन एक्शन में प्राप्त धनराशि का रिकॉर्ड
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रामप्रसाद बिस्मिल के पत्र, नज़्म ‘सरफरोशी की तमन्ना’ की मूल प्रति
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क्रांतिकारियों के जेल फोटोग्राफ और अशफाक के माउज़र पिस्तौल


