Thursday, July 30, 2026
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सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय योग प्राणायाम जरूरीः डॉ दिवाकर सिंह


अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के शारीरिक शिक्षा, खेल एवं योगिक विज्ञान संस्थान में पी.एम. उषा के सॉफ्ट कॉम्पोनेंट्स के अंतर्गत आयोजित एक महत्वपूर्ण विषय ‘दैनिक जीवन हेतु योग पर आधारित पांच दिवसीय कार्यशाला का अंतिम सत्र बड़े ही गरिमामय रीति के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज , अयोध्या से डॉ. दिवाकर सिंह एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में झुनझुनवाला पी.जी. कॉलेज, अयोध्या से डॉ. अविनाश शुक्ला उपस्थित रहे।

समापन सत्र में ’दैनिक जीवन में प्राणायाम की भूमिका विषय पर संबोधित करते हुए डॉ. दिवाकर सिंह ने कहा कि गोधूलि बेला अर्थात सूर्योदय व सूर्यास्त के समय प्राणायाम करने से सबसे अधिक लाभ होता है क्योंकि इस समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा सबसे अधिक होती है। उन्होंने अंतः कुंभक को शारीरिक सुदृढ़ता हेतु तथा बाह्य कुंभक को मानसिक प्रखरता हेतु प्रभावी अभ्यास बताया। उन्होंने सूर्यभेदी, चंद्रभेदी, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, भ्रामरी प्राणायाम का वैज्ञानिक रूप से उनके प्रयोग की विधि एवं सावधानियां का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बिना गुरु के आदेश के बिना किसी भी प्राणायाम को मनमानी ढंग से करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उचित रीति से किया गया प्राणायाम शरीर में जीवनी शक्ति के विकास में एवं विजातीय द्रव्यों की निष्कासन में काफी मददगार साबित होता है। आपने बताया कि साक्षात्कार अथवा किसी भी चुनौती पूर्ण स्थिति में किया गया प्राणायाम 1 से 2 मिनट के भीतर ही हृदय गति, श्वसन गति, घबराहट को कम करके आत्म विश्वास को बढ़ा देता है। उन्होंने निस्तेज व विकृत आभा मंडल को प्राणायाम के अभ्यास द्वारा तेजस्वी व सकारात्मक आभामंडल में परिवर्तित करने का प्रमाण प्रस्तुत किया। डॉ. दिवाकर सिंह ने बताया कि प्राणायाम से तंत्रिका तंत्र में होने वाली क्षति को भ्रामरी प्राणायाम के द्वारा रोककर जीर्ण-शीर्ण तंत्रिका कोशिका को पुनः नवीन किया जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ.अविनाश शुक्ला ने ’योग एवं आयुर्वेद के व्यावहारिक सूत्रों के माध्यम से स्वास्थ्य प्राप्ति“ विषय पर संबोधित करते हुए आयुर्वेद को युक्ति  विपाश्रय, स्वास्थ्य प्राप्ति हेतु किए गए यज्ञ, पूजन व प्रार्थना को देव विपाश्रय तथा योग को सात्त्वाजय के रूप में वर्णन किया।

कार्यशाला में संस्थान के डॉ. अनिल मिश्रा, डॉ. कपिल राणा डॉ. अनुराग पाण्डेय, डॉ. त्रिलोकी यादव, डॉ. मोहिनी पाण्डेय, स्वाति उपाध्याय, कुमार मंगलम सिंह, देवेंद्र वर्मा, संघर्ष सिंह,  आलोक तिवारी, दिवाकर पांडेय सहित विद्यार्थी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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