◆ राममंदिर के लिए संघर्ष व अयोध्या में होने वाले बदलाव पर केन्द्रित रहा दीपोत्सव पर मुख्यमंत्री का सम्बोधन
◆ यूपी की जीरो टालरेंस की नीति को लेकर रामायण में वर्णित दंण्डकारण्य का किया जिक्र
अयोध्या। दीपोत्सव पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरा सम्बोधन राममंदिर आन्दोलन के लिए हुए संघर्ष व अयोध्या में होने वाले बदलाव पर केन्द्रित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वही लोग है, जिन्होंने राममंदिर आन्दोलन के दौरान अपने अधिवक्ता को विरोध में खड़ा किया था। जिससे राममंदिर के मार्ग में बाधा खड़ी कर सके। उन्होंने गोली चलाई, हम अयोध्या में दीप जला रहे है। उन्होंने ताले लगवाए, संतो के आर्शीवाद व रामभक्तों के संघर्षो का प्रतिफल है, अयोध्या में भगवान के भव्य मंदिर का निर्माण हो गया है। इन्होंने अयोध्या की पहचान को मिटाया था। अयोध्या को फैजाबाद बनाया था। हमने अयोध्या की पहचान को अयोध्या से जोड़कर फिर से अयोध्या धाम बनाने का कार्य किया है। दीप इस बात की गवाही दे रहा है। आस्था को कोई राजनीति कैद नहीं कर सकती।
मुख्यमंत्री ने जातीय राजनीति की तुलना किया अंग्रेजों के फूट डालों की राजनीति से
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वही लोग अंग्रेजों के फूट डालो की नीति को अपनाकर आज भी जातीय विद्वेष पैदा करने का काम कर रहे है। जाति जाति के बीच में लड़ाने का काम कर रहे है। लेकिन आज के भारत ने पिछले 11 वर्षो में एक भारत श्रेष्ठ भारत के रुप में अपने आप को स्थापित किया है। आज भारत विकास कर रहा है व विरासत का संरक्षण भी कर रहा है। विकास और विरासत का संगम हमें अयोध्या में दिखने को मिल रहा है।
पूरे प्रदेश में जल रहे है एक करोड़ 51 लाख दीपक

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में दीपोत्सव में 1,71,000 दीप जलाए गए थे। वहीं आज नौवें दीपोत्सव पर केवल अयोध्या धाम में 26 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित हो रहे हैं। अगर पूरे प्रदेश भर में गणना की जाए तो 1 करोड़ 51 लाख दीप अकेले दीपोत्सव में जल रहे हैं। 2017 में जब हम लोगो ने पहला दीपोत्सव करने का निर्णय लिया था। इसके पीछे का भाव एक ही था। हजारों वर्ष पहले जब दुनिया अंधकार में जी रही थी तब अयोध्या ने अपने भगवान के लिए, अपनी आस्था के आगमन पर उनके अभिनंदन के लिए दीप प्रज्जवलित किए थे। वह दीपोत्सव व दीपावली एक महापर्व बन गया। उसी दीपोत्सव के कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखने के लिए फिर से उस अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। 2017 में यहां प्रज्जवलित करने के लिए हमें पर्याप्त मात्रा में दीप नहीं प्राप्त हुए थे। मुश्किल से 25 हजार दीप ही हमें अयोध्या धाम में मिल पाये थे, हमनें यहां के प्रजापति व कुम्हार समुदाय के लोगो का आवाहन किया तो 51 हजार ही मिल पाये। इसके लिए हमने प्रदेश भर से इकठ्ठा किया था तब जाकर एक लाख 71 दीप जल पाए थे। 2017 में एक लाख 71 हजार आज लाखों लाख दीप अयोध्या धाम में प्रज्जवलित होते है। जो हर भारतवासी के संकल्प के प्रतीक बनते है। यह दीप केवल दीप नहीं है 500 वर्षो के अंधकार पर आस्था के विजय के प्रतीक भी है। 500 वर्षो में किस प्रकार के अपमान को झेलना पड़ा था, किस प्रकार के संघर्ष से हमारे पूर्वज जूझे थे। यह दीप उसी के प्रतीक स्वरुप है। तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम तम्बू में विराजमान थे, और अब जब दीपोत्सव का नवम संस्करण हो रहा है। जब भगवान राम अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान है।
