Thursday, July 23, 2026
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अयोध्या में दिखेगी वाल्मीकि व निषादराज की आस्था


◆ संगमरमर से बनी महर्षि वाल्मीकि व निषादराज गुह्य की प्रतिमाएं स्थापित


◆ पीएम मोदी ने  मन की बात में किया विशेष उल्लेख, कहा दर्शन जरूर करें


अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका है। मंदिर परिसर में भगवान श्रीराम की कथा से जुड़े महापुरुषों महर्षि वाल्मीकि और निषादराज गुह्य के मंदिर भी बनकर तैयार हो रहे हैं। शनिवार को सप्तमंडप में दोनों महापुरुषों की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना की गई। जयपुर के शिल्पकारों द्वारा विशेष संगमरमर से निर्मित ये प्रतिमाएं मंदिर परिसर के दक्षिणी हिस्से में अंगद टीले के समीप स्थापित की गई हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 126वें संस्करण में महर्षि वाल्मीकि और निषादराज की आस्था पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के महान स्तंभों में से एक हैं। उनकी रचना रामायण ने समाज को भगवान श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों से परिचित कराया। प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु रामलला के दर्शन के साथ महर्षि वाल्मीकि और निषादराज मंदिर के दर्शन भी अवश्य करें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महर्षि वाल्मीकि जयंती (7 अक्तूबर) पर प्रदेश में अवकाश की घोषणा की है। इस अवसर पर प्रदेशभर के देवालयों में संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सहयोग से रामायण पाठ का आयोजन कराया जाएगा।

रामजन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर 2025 के बाद मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के लिए पूर्ण रूप से खोल दिया जाएगा। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, अयोध्या का यह स्वरूप भारतीय संस्कृति की समरस परंपरा का प्रतीक बनेगा। उनका मानना है कि रामकथा केवल राजमहलों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने वाली धारा है।

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